CCTV ने खोली पोल; पुलिस ने ऐसे दबोचा
पौड़ी गढ़वाल/कोटद्वार। कहते हैं, मां के गहने घर की वह पूंजी होते हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर परिवार की ढाल बनाया जाता है। लेकिन पौड़ी गढ़वाल में एक बेटे ने इस कहावत को अपने अंदाज में कुछ यूं समझा कि मां की जमा-पूंजी को अपने शौक की पूंजी बना लिया। करीब 20 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर उठाए और साहब राजस्थान की ओर ऐसे निकल लिए, मानो चोरी नहीं, कोई पर्यटन यात्रा पर जा रहे हों।

फर्क बस इतना था कि इस यात्रा का टिकट CCTV ने काट रखा था और मंजिल तक पहुंचने से पहले पुलिस भी पहुंच गई।
मामला बालासौड़ निवासी अनीता के घर का है। अनीता ने 5 अक्टूबर को कोतवाली कोटद्वार में शिकायत दर्ज कराई कि घर से सोने-चांदी के जेवर गायब हैं। घर में चोरी हुई तो स्वाभाविक तौर पर सवाल उठा—आखिर चोर आया कहां से और गया किधर?
पुलिस ने घटनास्थल देखा, आसपास पूछताछ की और फिर CCTV कैमरों की ‘आंखों’ को टटोला। तकनीकी साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस ने धीरे-धीरे वह राज खोलना शुरू किया, जिसे शायद घर की दीवारें भी बताने में हिचक रही थीं।
और आखिरकार शक की सुई बाहर के किसी शातिर चोर पर नहीं, घर के ही बेटे दीपांशु राजपूत पर जाकर टिक गई।
मां के गहने और बेटे की ‘जरूरतें’
पुलिस के मुताबिक दीपांशु ने अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और शौक पूरे करने के लिए मां के गहनों पर हाथ साफ किया। यानी जिस जेवर को मां ने वर्षों से संभालकर रखा था, बेटे को उसमें अपना ‘बजट’ नजर आने लगा।
गहने हाथ लगे तो युवक ने देर नहीं की। घर से निकला और सीधे राजस्थान की राह पकड़ ली।
शायद उसे लगा होगा कि घर से दूर निकलते ही मामला भी दूर हो जाएगा। लेकिन आधुनिक जमाने की सबसे बड़ी दिक्कत यही है—आप भले घर से हजार किलोमीटर दूर चले जाएं, आपका मोबाइल और CCTV कैमरे आपकी कहानी वहीं छोड़कर नहीं आते।
जयपुर पहुंचा बेटा, पुलिस भी पहुंच गई
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से दीपांशु की लोकेशन ट्रेस की तो पता चला कि जनाब राजस्थान के जयपुर पहुंच चुके हैं। लोकेशन झालूपुरा इलाके की मिली।
फिर क्या था—पुलिस टीम ने दबिश दी और दीपांशु को गिरफ्तार कर लिया।
यात्रा का वह अध्याय, जो शायद आरोपी ने अपने हिसाब से शुरू किया था, पुलिस ने झालूपुरा में आकर समाप्त कर दिया।
आरोपी के कब्जे से चोरी किए गए जेवर भी बरामद हो गए। पुलिस के अनुसार बरामद माल में 10.50 तोला सोने के आभूषण और 891 ग्राम चांदी के आभूषण शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है।
शौक महंगे थे, इसलिए रास्ता भी गलत चुन लिया
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे अपनी व्यक्तिगत जरूरतें और शौक पूरे करने के लिए पैसे चाहिए थे। बस, यहीं से उसने वह रास्ता चुन लिया, जहां जरूरत पूरी करने का सबसे आसान तरीका उसे मां के गहने नजर आए।
लेकिन शौक पूरे करने की यह तरकीब कुछ ज्यादा ही ‘महंगी’ साबित हुई।
मां के गहने बेचकर शौक पूरे करने निकला बेटा अब पुलिस की पूछताछ और अदालत की कार्रवाई के बीच अपने शौक का हिसाब देने की स्थिति में है।
CCTV से बचना अब उतना आसान नहीं
इस मामले में पुलिस के लिए सबसे बड़ा हथियार न कोई मुखबिर बना और न कोई फिल्मी अंदाज का पीछा। असली काम किया CCTV और तकनीकी सर्विलांस ने।
कैमरों ने रास्ता दिखाया, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस ने लोकेशन बताई और पुलिस टीम जयपुर पहुंच गई।
यानी जमाना ऐसा आ गया है कि चोरी करने से पहले चोर को ताला नहीं, CCTV देखना पड़ता है—और उसके बाद भी बच निकलने की गारंटी नहीं।
दीपांशु को जयपुर के झालूपुरा से गिरफ्तार कर चोरी किए गए जेवर बरामद कर लिए गए। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
पुलिस टीम की भूमिका
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी पौड़ी सर्वेश पंवार के निर्देश पर एएसपी कोटद्वार मनोज कुमार ठाकुर तथा सीओ कोटद्वार अस्मिता ममगाईं के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम गठित की गई थी।
टीम ने घटनास्थल से लेकर CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों तक कड़ियां जोड़ीं और आखिरकार पौड़ी से निकली चोरी की कहानी को जयपुर में जाकर विराम दिया।
फिलहाल मां के गहने वापस आ गए हैं, लेकिन बेटे के ‘शौक’ की कीमत अब अदालत तय करेगी।









