लगातार तीसरी बार विश्वविद्यालय चैंपियन बना नारायण नगर महाविद्यालय

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लगातार तीसरी बार विश्वविद्यालय चैंपियन बना नारायण नगर महाविद्यालय
लगातार तीसरी बार विश्वविद्यालय चैंपियन बना नारायण नगर महाविद्यालय

महिला वॉलीबॉल टीम ने खटीमा में रचा इतिहास

‘गढ़ भोज दिवस’ में दिखी पहाड़ की समृद्ध लोक खाद्य संस्कृति

सीएनई रिपोर्टर, पिथौरागढ़। संत नारायण स्वामी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायण नगर के लिए बुधवार का दिन उपलब्धियों, उत्साह और सांस्कृतिक गौरव से सराबोर रहा। एक ओर महाविद्यालय की महिला वॉलीबॉल टीम ने अपनी शानदार खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार विश्वविद्यालय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, वहीं दूसरी ओर महाविद्यालय परिसर में आयोजित ‘गढ़ भोज दिवस’ ने उत्तराखंड की पारंपरिक खान-पान संस्कृति, स्थानीय उत्पादों और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश विद्यार्थियों तक पहुंचाया।


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खटीमा में आयोजित अंतर-महाविद्यालयी वॉलीबॉल प्रतियोगिता में नारायण नगर महाविद्यालय की महिला टीम ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने अपने बेहतरीन खेल, मजबूत तालमेल और अनुशासित रणनीति के दम पर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। निर्णायक फाइनल मुकाबले में टीम ने चम्पावत महाविद्यालय की टीम को पराजित कर विश्वविद्यालय चैंपियनशिप अपने नाम कर ली।

लगातार तीसरी बार विश्वविद्यालय चैंपियन बनने की उपलब्धि ने महाविद्यालय के खेल इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। इस सफलता से महाविद्यालय परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।

खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के पीछे उनके निरंतर अभ्यास, उत्कृष्ट खेल कौशल, अनुशासन, आपसी समन्वय और मजबूत टीम भावना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही प्रशिक्षक एवं खेल प्रभारियों के मार्गदर्शन ने भी टीम को बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

महिला वॉलीबॉल टीम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रोफेसर प्रेमलता कुमारी सहित समस्त प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने खिलाड़ियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्राचार्या ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि खेल विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम है।

‘गढ़ भोज दिवस’ में जीवंत हुई पहाड़ की रसोई

महाविद्यालय में इसी अवसर पर ‘गढ़ भोज दिवस’ का भी उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। प्राचार्या डॉ. प्रोफेसर प्रेमलता कुमारी की अध्यक्षता में हिंदी विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्तराखंड की पारंपरिक भोजन संस्कृति, स्थानीय अनाजों और पहाड़ी व्यंजनों की समृद्ध परंपरा से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पक्ष रहा—पारंपरिक पहाड़ी चूल्हे पर प्राध्यापकों द्वारा तैयार किया गया स्थानीय भोजन। चूल्हे पर पकते पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू ने पूरे परिसर को पहाड़ की पारंपरिक रसोई की अनुभूति से भर दिया।

इस अवसर पर मंडुवे की रोटी, भट्ट की दाल, गहत, फाणु, काफली, आलू के गुटके, सिसुण का साग और झंगोरे की खीर सहित अनेक पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन तैयार किए गए। विद्यार्थियों ने इन व्यंजनों का स्वाद लेने के साथ ही इनके पीछे छिपी उत्तराखंड की पारंपरिक जीवनशैली और स्थानीय संसाधनों की उपयोगिता को भी समझा।

स्थानीय अनाजों में छिपा स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का संदेश

कार्यक्रम में प्रो. प्रेमलता पंत, डॉ. मनीष बेलवाल एवं डॉ. वंदिता कांडपाल ने स्थानीय भोजन के स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पारंपरिक अनाज और स्थानीय खाद्य पदार्थ केवल हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

मंडुवा, झंगोरा, भट्ट और गहत जैसे पारंपरिक पहाड़ी अनाज एवं दालें लंबे समय से पर्वतीय समाज के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। बदलती जीवनशैली के बीच इन स्थानीय खाद्य पदार्थों को फिर से दैनिक भोजन का हिस्सा बनाना स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ स्थानीय कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. वंदिता कांडपाल ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को स्थानीय भोजन एवं उत्तराखंड की खाद्य परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता से अवगत कराया।

एक ही दिन में खेल, संस्कृति और परंपरा का संगम

महाविद्यालय परिसर में आयोजित दोनों कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों के सामने प्रतिभा और परंपरा के दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत किए। जहां महिला वॉलीबॉल टीम की उपलब्धि ने युवा शक्ति, अनुशासन, मेहनत और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का परिचय दिया, वहीं ‘गढ़ भोज दिवस’ ने विद्यार्थियों को अपनी माटी, परंपरा, स्थानीय उत्पाद और पहाड़ी जीवनशैली से जोड़ा।

महाविद्यालय में दिया गया संदेश—“स्थानीय भोजन—स्वस्थ जीवन—समृद्ध पहाड़”—पूरे आयोजन का सार बनकर उभरा।

लगातार तीसरी बार विश्वविद्यालय चैंपियन बनने वाली महिला वॉलीबॉल टीम की उपलब्धि और ‘गढ़ भोज दिवस’ के माध्यम से पहाड़ की पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का प्रयास, दोनों ने यह साबित किया कि महाविद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, खेल प्रतिभा, सांस्कृतिक चेतना और अपनी जड़ों से जुड़ाव के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है।

7 अक्टूबर का यह दिन नारायण नगर महाविद्यालय के लिए इसलिए भी यादगार बन गया कि एक ही दिन परिसर ने जीत का उत्साह, युवाओं की ऊर्जा, पहाड़ी संस्कृति की खुशबू और स्थानीय परंपराओं का गौरव—चारों को एक साथ महसूस किया।

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