क्षेत्र में बढ़ता जा रहा कटखने बंदरों का आतंक
ग्रामीणों में दहशत—प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। नैनीपुल क्षेत्र में बंदरों का आतंक अब लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनता जा रहा है। आए दिन बंदरों के झुंड आबादी वाले क्षेत्रों में घुसकर लोगों को परेशान कर रहे हैं। इसी क्रम में राजकीय इंटर कॉलेज रैंगल के प्रवक्ता अनिल कुमार शर्मा पर एक बंदर ने अचानक हमला कर दिया और उनकी पीठ पर काट लिया। अचानक हुए इस हमले से शिक्षक घबरा गए और आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी मच गई।
बताया गया कि नैनीपुल में शिक्षक अनिल कुमार शर्मा अपने कार्य से जा रहे थे, तभी एक बंदर ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। बंदर ने उनकी पीठ पर काट लिया। शिक्षक द्वारा बचाव का प्रयास करने के बावजूद बंदर कुछ देर तक आक्रामक बना रहा।
घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान सिरसा भुवन चंद्र तथा स्थानीय नागरिक नवीन तिवारी और चंद्र प्रकाश जीना मौके पर पहुंचे। उन्होंने काफी मशक्कत के बाद हमलावर बंदर को वहां से भगाया। इसके बाद घायल शिक्षक को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुयालबाड़ी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी चोट का उपचार करने के साथ आवश्यक इंजेक्शन लगाया।
बंदरों के आतंक से ग्रामीण परेशान
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नैनीपुल और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आबादी वाले क्षेत्रों में बंदरों के झुंड खुलेआम घूमते रहते हैं और कई बार लोगों पर अचानक झपट पड़ते हैं। स्थिति यह है कि लोगों को रास्तों से गुजरते समय भी सतर्क रहना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार, कटखने बंदरों द्वारा इससे पहले भी कई लोगों को काटकर घायल किया जा चुका है। बंदरों के लगातार आक्रामक व्यवहार के कारण बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों में विशेष रूप से भय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना भी हो सकती है।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि बंदरों का सबसे अधिक खतरा उन लोगों को रहता है जो उनका सामना होने पर तेजी से बचाव नहीं कर पाते। स्कूल आने-जाने वाले बच्चों तथा बुजुर्गों को लेकर अभिभावकों में भी चिंता बनी हुई है। कई बार बंदर घरों की छतों और आंगनों में घुसकर खाद्य सामग्री उठा ले जाते हैं तथा सामान को नुकसान पहुंचाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के भय के कारण कई लोग घर से बाहर निकलते समय भी सावधानी बरतने को मजबूर हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक क्षेत्रवासी बंदरों के आतंक के बीच रहने को मजबूर रहेंगे?
ग्रामीणों ने की बंदरों को पकड़ने की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में तत्काल अभियान चलाकर उत्पाती एवं कटखने बंदरों को पिंजरों में पकड़कर मानव आबादी से दूर सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल बंदरों को भगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए संबंधित विभाग को क्षेत्र का सर्वे कर बंदरों की संख्या और उनके आवागमन वाले स्थानों को चिन्हित करते हुए प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि बंदरों के आतंक पर शीघ्र अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने प्रशासन से मानव सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल बंदर पकड़ने का अभियान शुरू करने की मांग की है।


