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नंदा-सुनंदा महोत्सव में बिखरे पहाड़ की कला और संस्कृति के रंग

ऐपण, उत्तराखंडी व्यंजन व चित्रकला प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने दिखाई प्रतिभा

विजेताओं को किया गया सम्मानित

सीएन संवाददाता, रानीखेत। रानीखेत में आयोजित मां नंदा-सुनंदा महोत्सव के तहत विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया जा रहा है। महोत्सव में जहां एक ओर सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक कला, पहाड़ी खान-पान और चित्रकला से जुड़ी प्रतियोगिताओं के माध्यम से स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है। सोमवार को आयोजित ऐपण, उत्तराखंडी व्यंजन तथा अंतरविद्यालयी चित्रकला प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया।

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महोत्सव के अंतर्गत आयोजित पारंपरिक ऐपण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की लोककला की समृद्ध परंपरा को अपनी कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों के वर्ग में मिशन इंटर कॉलेज की कामिनी बेलवाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय आदर्श बालिका इंटर कॉलेज की हर्षिता पांडे द्वितीय तथा मानसी रावत तृतीय स्थान पर रहीं।

महिला वर्ग की ऐपण प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इसमें कमला जोशी ने अपनी कलात्मक प्रस्तुति के आधार पर प्रथम स्थान हासिल किया। प्रीति बवाड़ी ने द्वितीय और सीमा भाकुनी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता के माध्यम से महिलाओं ने पारंपरिक ऐपण कला के विविध रूपों और आकर्षक डिजाइनों को सामने रखा।

इसी क्रम में आयोजित उत्तराखंडी व्यंजन प्रतियोगिता में भी पहाड़ के पारंपरिक स्वाद और स्थानीय खान-पान की विविधता देखने को मिली। प्रतियोगिता में नीमा बेलवाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि नैना कांडपाल द्वितीय और लीला नयाल तृतीय स्थान पर रहीं। इसके अलावा अर्चना सती को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। रीतु, खष्टी, इंदू और विजेता को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

महोत्सव में इसी दिन आयोजित अंतरविद्यालयी चित्रकला प्रतियोगिता के परिणाम भी घोषित किए गए। विभिन्न आयु वर्गों में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और चित्रकला प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के सब-जूनियर वर्ग में एपीएस के रिधान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। एपीएस की गर्विता बवाड़ी द्वितीय तथा कैंट प्राइमरी स्कूल की तरूना तृतीय स्थान पर रहीं।

जूनियर वर्ग में केवी की संध्या ने प्रथम स्थान हासिल किया। एपीएस की कुमुद बिष्ट को द्वितीय तथा केवी के पारस मेहरा को तृतीय स्थान मिला। वहीं सीनियर वर्ग में गौरव कोटल्या ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। एपीएस के देबव्रत ने द्वितीय और राजकीय आदर्श बालिका इंटर कॉलेज की उपासना ने तृतीय स्थान हासिल किया।

प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी डॉ. रजनी भट्ट, मीना साह, शोभा पंत, नेहा माहरा और ज्योति साह ने निभाई। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की कला, प्रस्तुति, रचनात्मकता और विषय के अनुरूप किए गए प्रयासों के आधार पर विजेताओं का चयन किया।

कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत सदस्य प्रदीप कुमार ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए। समिति के पदाधिकारियों ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। आयोजन में उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं नई पीढ़ी को अपनी लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और स्थानीय खान-पान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मां नंदा-सुनंदा महोत्सव में आयोजित इन प्रतियोगिताओं ने यह भी दर्शाया कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ लोककला और स्थानीय परंपराओं को प्रोत्साहन देने से समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर बच्चों, युवाओं और महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता है। महोत्सव के दौरान आगे भी विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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