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CNE की खबर का बड़ा असर: लोधिया इंटर कॉलेज के जर्जर भवन पर डीएम का सख्त फैसला

अब Food Craft Institute में चलेगी पढ़ाई

डीएम ने माना—खराब भवन में पढ़ाई कराना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। राजकीय इंटर कॉलेज लोधिया के जर्जर भवन में छत का भारी प्लास्टर भरभराकर गिरने और एक शिक्षक के बाल-बाल बचने की सीएनई की खबर का बड़ा असर सामने आया है। विद्यालय भवन की खतरनाक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी/अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अंशुल सिंह ने अब राजकीय इंटर कॉलेज लोधिया के शिक्षण कार्य के लिए तत्काल वैकल्पिक सुरक्षित परिसर की व्यवस्था करने का आदेश जारी कर दिया है।

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जिलाधिकारी की ओर से 9 सितंबर 2026 को जारी आदेश संख्या 3129/आपदप्रशा/2026-27 में स्पष्ट कहा गया है कि वर्तमान में हो रही अतिवृष्टि/प्राकृतिक आपदा के कारण राजकीय इंटर कॉलेज लोधिया का भवन काफी क्षतिग्रस्त हो गया है और भवन की स्थिति अत्यंत खराब है। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे भवन में शिक्षण कार्य कराया जाना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।

प्रशासन ने अब Food Craft Institute, Lodhiya, Almora के उपलब्ध भवन/परिसर को अस्थायी रूप से राजकीय इंटर कॉलेज लोधिया के शिक्षण कार्य के लिए अधिग्रहित करने का निर्णय लिया है।


जिस छत ने पैदा किया था डर, अब वहां बच्चों की पढ़ाई पर रोक

बुधवार को जीआईसी लोधिया के मुख्य भवन स्थित स्टाफ रूम में छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा था। घटना के कुछ क्षण पहले तक एक शिक्षक उसी स्थान पर बैठकर अपना काम कर रहे थे। वह खिड़की खोलने के लिए जैसे ही कुर्सी से उठकर आगे गए, उसी जगह छत का मलबा आ गिरा।

गनीमत रही कि शिक्षक उस समय अपनी सीट पर नहीं थे। अन्यथा छत से गिरा भारी मलबा सीधे उनके ऊपर गिर सकता था और गंभीर हादसा हो सकता था।

सीएनई ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रमुखता से उठाते हुए सवाल खड़ा किया था कि जब विद्यालय की छत ही सुरक्षित नहीं है तो उसके नीचे पढ़ने वाले बच्चों और काम करने वाले शिक्षकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

अब प्रशासन के ताजा आदेश ने इस चिंता पर तत्काल कार्रवाई की मुहर लगा दी है।


डीएम अल्मोड़ा ने जारी किया यह आदेश

जिलाधिकारी के आदेश में कहा गया है कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा तथा शिक्षण कार्य को निर्बाध रूप से संचालित किए जाने के लिए वैकल्पिक भवन की तत्काल आवश्यकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 33, 34 एवं धारा 65(1)(ई) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए Food Craft Institute, Lodhiya, Almora के उपलब्ध भवन/परिसर को अस्थायी रूप से राजकीय इंटर कॉलेज लोधिया के शिक्षण कार्य के लिए अधिग्रहित किया गया है।

इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक लोधिया इंटर कॉलेज का क्षतिग्रस्त भवन दोबारा सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक बच्चों को वैकल्पिक परिसर में पढ़ाने की व्यवस्था की गई है।


खतरे वाले भवन से सुरक्षित परिसर तक—तत्काल व्यवस्था

आदेश में उप निदेशक पर्यटन, अल्मोड़ा को निर्देशित किया गया है कि Food Craft Institute के भवन/परिसर को राजकीय इंटर कॉलेज लोधिया के लिए उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका उपयोग तब तक किया जाएगा, जब तक क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन को पुनः सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता।

यानी प्रशासन ने फिलहाल कोई जोखिम लेने के बजाय विद्यालय के संचालन के लिए सुरक्षित वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।


अब परिसर की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी भी तय

जिलाधिकारी के आदेश में केवल वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराने तक ही बात सीमित नहीं रखी गई है। मुख्य शिक्षा अधिकारी, अल्मोड़ा को भी आवश्यक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आदेश के अनुसार यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिग्रहित परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्य एवं शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाए। इसके साथ ही परिसर की स्वच्छता, सुरक्षा तथा संपत्ति की समुचित देखभाल एवं रख-रखाव भी सुनिश्चित किया जाएगा।

इससे यह भी स्पष्ट है कि वैकल्पिक भवन में बच्चों को भेजने के साथ-साथ वहां की व्यवस्थाओं पर भी प्रशासन की नजर रहेगी।


सीएनई की खबर के बाद बदली तस्वीर

लोधिया इंटर कॉलेज की जर्जर हालत कोई अचानक सामने आई समस्या नहीं थी। विद्यालय भवन की स्थिति को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और चिंताजनक हो जाती है।

लेकिन बुधवार को स्टाफ रूम की छत का प्लास्टर गिरने की घटना ने खतरे को बिल्कुल सामने ला दिया। जिस स्थान पर कुछ क्षण पहले शिक्षक बैठे थे, ठीक उसी स्थान पर मलबा गिरना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण बन गया कि विद्यालय भवन में किसी बड़े हादसे की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सीएनई ने इस घटना को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए प्रशासन और जिम्मेदार विभागों का ध्यान इस गंभीर खतरे की ओर खींचा था। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने अब ठोस कदम उठाते हुए बच्चों और शिक्षकों को जर्जर भवन से हटाकर वैकल्पिक परिसर में शिक्षण कार्य कराने का निर्णय लिया है।


पहले निरीक्षण, फिर प्लास्टर गिरने की घटना और अब वैकल्पिक भवन

इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने विद्यालय की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण भी किया था। निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर की जर्जर इमारतों की स्थिति सामने आई थी और असुरक्षित भवनों को लेकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद छत का प्लास्टर गिरने की घटना ने खतरे की गंभीरता को और उजागर कर दिया।

अब 9 सितंबर को जारी नया आदेश बताता है कि प्रशासन ने केवल निरीक्षण और निर्देशों तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि तत्काल शिक्षण व्यवस्था को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय भी ले लिया है।


अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता पर मिली तत्काल राहत

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के लिए यह आदेश बड़ी राहत माना जा सकता है। उनका सबसे बड़ा सवाल यही था कि जर्जर भवन में बच्चों को कब तक बैठाया जाएगा।

अब कम से कम फिलहाल बच्चों को उस भवन के नीचे बैठकर पढ़ाई नहीं करनी होगी, जिसकी छत से प्लास्टर गिरने की घटना सामने आ चुकी है।

हालांकि विद्यालय के पुराने भवन की तकनीकी जांच, असुरक्षित हिस्सों की स्थिति, मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण और भविष्य में स्थायी भवन की व्यवस्था जैसे सवाल अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।


आज वैकल्पिक भवन मिला, अब नजर स्थायी समाधान पर

प्रशासन के इस आदेश से तत्काल खतरा जरूर टलता दिखाई दे रहा है, लेकिन लोधिया इंटर कॉलेज की मूल समस्या अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

वैकल्पिक भवन में पढ़ाई शुरू होना तत्काल सुरक्षा का समाधान है, स्थायी समाधान नहीं। अब जरूरी होगा कि विद्यालय के जर्जर भवन का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाए, यह निर्धारित किया जाए कि कौन से हिस्से मरम्मत योग्य हैं और किन भवनों को हटाना जरूरी है।

साथ ही विद्यालय के लिए स्थायी और सुरक्षित भवन की कार्ययोजना भी तेजी से आगे बढ़े, ताकि बच्चों को लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई न करनी पड़े।

फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही—जिस छत ने हादसे की चेतावनी दी थी, उसके नीचे बच्चों को पढ़ाने का जोखिम प्रशासन ने टाल दिया है।

सीएनई की खबर का असर अब सरकारी आदेश के रूप में सामने है।

यहां देखिए आदेश —

पूर्व प्रकाशित खबर —

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