महापंचायत के दौरान मंदिर परिसर में बढ़ा विवाद
पुलिस के सामने भी हुई खींचतान
निर्माण और कथित अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से चल रहा है विरोध
सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। काठगोदाम के रानीबाग स्थित ऐतिहासिक चित्रेश्वरधाम शनिवार को धार्मिक आयोजन के बीच उस समय अखाड़ा बन गया, जब मंदिर परिसर में चल रहे भंडारे के दौरान दो पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद देखते ही देखते तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और खींचतान में बदल गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में भी तनाव कम नहीं हुआ। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने करीब सात लोगों को हिरासत में लिया। इनमें पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत और सुभाष कांडपाल के शामिल होने की बात सामने आई है। संगठन का आरोप है कि दोनों को अब तक नहीं छोड़ा गया है, जिसे लेकर पहाड़ी आर्मी में तीव्र आक्रोश है।
यह पूरा विवाद महज भंडारे के दौरान हुए हंगामे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे चित्रशिला रानीबाग क्षेत्र में धार्मिक स्थल, निर्माण और कथित अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विरोध बताया जा रहा है।
मां जिया की तपोस्थली को लेकर कत्यूरी समाज में आक्रोश
कत्यूरी समाज के लोगों की चित्रशिला रानीबाग से गहरी धार्मिक और ऐतिहासिक आस्था जुड़ी है। समाज के लोगों का आरोप है कि मां जिया की तपोस्थली माने जाने वाले इस क्षेत्र में वर्षों से लगातार ऐसे निर्माण और गतिविधियां हो रही हैं, जिन्हें वह धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के लिए खतरा मानते हैं।
समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि उनके विरोध के बावजूद पहले क्षेत्र में विद्युत शवदाह गृह का निर्माण किया गया। इसके बाद चौपाटी बनाने के प्रयास का मामला सामने आया और अब चित्रेश्वरधाम परिसर में शनि मंदिर एवं अन्य निर्माण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कत्यूरी समाज का आरोप है कि यदि इस प्रकार की गतिविधियां लगातार जारी रहीं तो भविष्य में उनकी पारंपरिक आस्था और धार्मिक स्थल का मूल स्वरूप प्रभावित हो सकता है। इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को पहाड़ी आर्मी के बैनर तले महापंचायत आयोजित की गई थी।
महापंचायत के बीच आमना-सामना
शनिवार को एक ओर पहाड़ी आर्मी और कत्यूरी समाज से जुड़े लोग अपनी मांगों और आपत्तियों को लेकर महापंचायत कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर श्री शनिदेव जी महाराज एवं नवग्रह मंदिर समिति की ओर से मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया था।
समिति के अनुसार शनि मंदिर की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह धार्मिक आयोजन किया गया था। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले कहासुनी हुई और इसके बाद माहौल तेजी से तनावपूर्ण हो गया। देखते ही देखते दोनों ओर से लोग आमने-सामने आ गए और धक्का-मुक्की तथा खींचतान शुरू हो गई।
बर्तन फेंकने और टेंट फाड़ने के आरोप
मंदिर समिति की ओर से आरोप लगाया गया कि विरोध करने पहुंचे लोगों ने भंडारे में व्यवधान पैदा किया। आरोप है कि इस दौरान भंडारे के बर्तन फेंके गए और टेंट को नुकसान पहुंचाया गया। इससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई।
दूसरी ओर विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि मंदिर परिसर में जिस तरह से निर्माण और अन्य गतिविधियां की जा रही हैं, उनके खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, लेकिन उनकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
यही विवाद शनिवार को महापंचायत के दौरान अचानक उग्र हो गया।
पुलिस के सामने भी नहीं थमा विवाद
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति तत्काल सामान्य नहीं हो सकी। पुलिस के सामने ही दोनों पक्षों के बीच खींचतान की स्थिति बनी रही।
स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस ने करीब सात लोगों को हिरासत में लिया। इसके बाद मौके पर स्थिति शांत हुई।
बताया गया कि क्षेत्र से वीआईपी मूवमेंट भी प्रस्तावित था, जिसके चलते पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति की आशंका को देखते हुए तत्काल सख्ती बरती।
हरीश रावत और सुभाष कांडपाल को नहीं छोड़े जाने पर आक्रोश
पहाड़ी आर्मी का आरोप है कि हिरासत में लिए गए लोगों में संगठन के संस्थापक हरीश रावत और सुभाष कांडपाल भी शामिल हैं और अन्य लोगों को छोड़े जाने के बावजूद दोनों को अब तक नहीं छोड़ा गया है।
संगठन ने इसे कार्रवाई में असमानता बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। पहाड़ी आर्मी का कहना है कि यदि धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दे पर आवाज उठाना अपराध है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी पक्षों की भूमिका सामने आनी चाहिए।
हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में पुलिस की ओर से होने वाली आगे की कानूनी कार्रवाई ही स्थिति को स्पष्ट करेगी।
पहाड़ी आर्मी का आरोप—प्राचीन स्थल के स्वरूप से हो रही छेड़छाड़
पहाड़ी आर्मी और कत्यूरी समाज की ओर से सबसे बड़ा सवाल मंदिर परिसर में निर्माण को लेकर उठाया जा रहा है।
संगठन का आरोप है कि चित्रेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है और वहां किए जा रहे निर्माण कार्य से इसके मूल स्वरूप को नुकसान पहुंच रहा है। आरोप लगाया गया है कि परिसर में लोहे के एंगल सहित अन्य संरचनाएं खड़ी की जा रही हैं।
विरोध करने वालों का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक अथवा धार्मिक स्थल पर निर्माण से पहले संबंधित भूमि, स्वामित्व, अनुमति और पुरातात्विक एवं धार्मिक महत्व से जुड़े सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।
मंदिर समिति का पलटवार—आपत्ति है तो कानून का रास्ता अपनाएं
दूसरी ओर श्री शनिदेव जी महाराज एवं नवग्रह मंदिर समिति का कहना है कि धार्मिक आयोजन के दौरान इस तरह हंगामा करना उचित नहीं है।
समिति के अध्यक्ष हेमंत कुमार भय्यू के अनुसार शनि मंदिर की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने पर श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया था। समिति का आरोप है कि विरोध के नाम पर आयोजन में व्यवधान डाला गया और भंडारे के बर्तन तथा टेंट को नुकसान पहुंचाया गया।
समिति का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति, संगठन या समाज को मंदिर परिसर में हो रहे निर्माण पर आपत्ति है तो वह प्रशासन अथवा न्यायालय के समक्ष अपनी शिकायत रख सकता है। कानून हाथ में लेकर धार्मिक आयोजन को बाधित करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
विवाद की असली जड़ निर्माण या कब्जे का आरोप?
चित्रेश्वरधाम में शनिवार को हुआ हंगामा अचानक पैदा हुआ विवाद नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे मंदिर परिसर और आसपास की भूमि में निर्माण तथा धार्मिक स्वरूप को लेकर लंबे समय से चली आ रही आपत्तियां बताई जा रही हैं।
एक पक्ष इसे धार्मिक स्थल पर कथित अतिक्रमण और मूल स्वरूप से छेड़छाड़ का मामला बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे धार्मिक आयोजन में बाधा डालने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश बता रहा है।
ऐसे में अब केवल हिरासत और हंगामे की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि प्रशासन को उस मूल विवाद की भी जांच करनी होगी जिसके कारण दोनों पक्ष आमने-सामने आए।
प्रशासन के सामने कई बड़े सवाल
चित्रेश्वरधाम प्रकरण ने प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- मंदिर परिसर की भूमि का वास्तविक स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड क्या कहते हैं?
- परिसर में हुए अथवा हो रहे निर्माण के लिए किस विभाग से अनुमति ली गई है?
- क्या निर्माण से ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल के मूल स्वरूप पर वास्तव में असर पड़ रहा है?
- क्षेत्र में कथित अतिक्रमण की शिकायतों पर पहले क्या कार्रवाई हुई?
- शनिवार को हुए हंगामे में किस पक्ष की भूमिका कितनी रही?
- हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ पुलिस ने किस आधार पर कार्रवाई की?
- यदि किसी पक्ष को निर्माण पर आपत्ति थी तो क्या उसकी शिकायत पर प्रशासन ने पहले कोई जांच की थी?
इन सवालों का जवाब सामने आना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मामला केवल दो पक्षों के बीच हुए विवाद का नहीं, बल्कि एक ऐसे धार्मिक स्थल से जुड़ा है, जिससे स्थानीय समाज की आस्था और ऐतिहासिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
51 किलो खीर का भोग भी लगाया गया
इधर, शनिवार को चित्रेश्वरधाम स्थित शनि मंदिर में धार्मिक आयोजन के तहत 51 किलो खीर का भोग लगाया गया। मंदिर समिति के अनुसार शनिवार को शनि देव को विशेष भोग अर्पित किया गया।
इस दौरान शैलू कुमार, प्रदीप अंसारी, विवेक त्रिपाठी, दिनेश मिश्रा, मंदिर व्यवस्थापक हेमंत कुमार, साहिल गिरी महाराज और गूंग सिंह डंगवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
अब जांच पर टिकी नजर
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद मौके पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन चित्रेश्वरधाम का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। एक ओर हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर पहाड़ी आर्मी और कत्यूरी समाज में नाराजगी है, तो दूसरी ओर मंदिर समिति अपने धार्मिक आयोजन में बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है।
अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, मंदिर परिसर के निर्माण की वैधता और दोनों पक्षों की शिकायतों पर प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि चित्रेश्वरधाम का यह विवाद किस दिशा में जाता है।





