मालवाहक वाहनों पर 24 घंटे प्रतिबंध, जरूरी सेवाओं को छूट
गिरने की कगार पर बिजली का पोल, बड़े हादसे का खतरा
— अनूप सिंह जीना की ग्राउंड रिपोर्ट

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नैनीताल/अल्मोड़ा। अल्मोड़ा–हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर मानसूनी बारिश के बीच यात्रियों और वाहन चालकों के लिए बड़ी और बेहद जरूरी खबर है। राष्ट्रीय राजमार्ग-87 (नया एनएच-109) के किलोमीटर 31 पर स्थित रामगाढ़ पुल से भारी और मालवाहक वाहनों की आवाजाही 20 जुलाई 2026 तक पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। 11 जुलाई को हुई अत्यधिक बारिश से पुल के बाएं एबटमेंट की डाउनस्ट्रीम विंग वॉल करीब 12 मीटर तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है और वर्तमान में पुल की चौड़ाई करीब 3.50 मीटर ही रह गई है।
इधर, पहले से ही भूस्खलन की मार झेल रहे क्वारब–चौंसली (डोबा–चौंसली) वैकल्पिक लिंक मार्ग पर एक विद्युत पोल गिरने की कगार पर है। मौके का जायजा लेने पहुंचे सीएनई संवाददाता ने पोल की चिंताजनक स्थिति देखी। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि तेज बारिश अथवा अतिवृष्टि के दौरान पोल सड़क या किसी राहगीर पर गिरा तो बड़ा हादसा हो सकता है।
रामगाढ़ पुल पर भारी वाहनों के लिए 24 घंटे प्रतिबंध
अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) नैनीताल के पत्र संख्या 1817/13-सीआरए (आ.प्र.प्रा.)/2026, दिनांक 13 जुलाई 2026 के क्रम में रामगाढ़ पुल पर भारी एवं मालवाहक वाहनों के आवागमन पर 20 जुलाई तक 24 घंटे प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रशासन के अनुसार 11 जुलाई को क्षेत्र में हुई अत्यधिक वर्षा के कारण रामगाढ़ पुल के बाएं एबटमेंट के डाउनस्ट्रीम की विंग वॉल लगभग 12 मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गई। इसके चलते पुल की प्रभावी चौड़ाई लगभग 3.50 मीटर रह गई है।
ऐसी स्थिति में भारी और मालवाहक वाहनों की आवाजाही जारी रहने से पुल तथा एप्रोच मार्ग को और अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका है। सुरक्षा को देखते हुए विंग वॉल का मरम्मत कार्य पूरा होने तक भारी वाहनों को पुल से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।
🚧 यह रहेगा भारी वाहनों का डायवर्जन प्लान
अल्मोड़ा से हल्द्वानी : सभी भारी एवं मालवाहक वाहन क्वारब–नथुवाखान–रामगढ़–भवाली होते हुए हल्द्वानी जाएंगे।
रानीखेत से हल्द्वानी : भारी एवं मालवाहक वाहन खैरना–क्वारब–नथुवाखान–रामगढ़–भवाली मार्ग का उपयोग करेंगे।
हल्द्वानी से अल्मोड़ा : भारी एवं मालवाहक वाहन खुटानी होकर जाएंगे, जबकि शेष वाहन भवाली–रामगढ़–नथुवाखान–क्वारब मार्ग से अल्मोड़ा पहुंचेंगे।
हल्द्वानी से रानीखेत : सभी भारी एवं मालवाहक वाहन भवाली–रामगढ़–नथुवाखान–क्वारब–खैरना होकर संचालित होंगे।
नैनीताल/ज्योलीकोट से अल्मोड़ा व रानीखेत : सभी भारी एवं मालवाहक वाहनों को भवाली–रामगढ़–नथुवाखान–क्वारब मार्ग से भेजा जाएगा।
गैस, तेल और सेना के वाहनों को प्रतिबंध से छूट
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गैस, तेल, सेना के वाहन, यात्री वाहन और अन्य अति आवश्यक सामग्री लेकर चलने वाले वाहनों को डायवर्जन व्यवस्था से मुक्त रखा गया है।
यातायात पुलिस नैनीताल ने भारी एवं मालवाहक वाहन स्वामियों और चालकों से निर्धारित डायवर्जन प्लान का पालन करने की अपील की है। पुलिस ने वाहन चालकों से यातायात संबंधी निर्देशों में सहयोग करते हुए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने को कहा है।
⚠️ चौंसली लिंक रोड पर अब बिजली का पोल बना खतरा, कभी भी हो सकता है धराशायी!
इस बीच सीएनई के लिए एक और गंभीर स्थिति सामने आई है। क्वारब–चौंसली लिंक मार्ग पर एक विद्युत पोल गिरने की कगार पर पहुंच चुका है। सोमवार को सीएनई संवाददाता ने मार्ग का स्थलीय दौरा किया तो पोल की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी।
बारिश और कमजोर होती जमीन के बीच पोल के कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है। यदि पोल किसी वाहन, राहगीर अथवा सड़क पर गिरा तो बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। बरसात के दौरान अतिवृष्टि होने पर खतरा और अधिक बढ़ सकता है।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य विपिन गुरूरानी ने भी मामले पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि विद्युत पोल कभी भी गिर सकता है। संबंधित विभाग को समय रहते पोल को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि तेज बारिश अथवा अतिवृष्टि हुई तो यही पोल किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
CNE ने उठाया मामला, एई लोनिवि से हुई बातचीत
सीएनई संवाददाता अनूप सिंह जीना ने विद्युत पोल के खतरे को लेकर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता कुंदन गिरी गोस्वामी से भी बातचीत की।
एई गोस्वामी ने सीएनई को बताया कि संबंधित स्थान पर पावर विभाग की विद्युत लाइन है। सोमवार को डीडीएमओ, तहसीलदार, जिला सूचना अधिकारी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मौके का निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि मौके पर स्थिति को लेकर चर्चा के बाद पावर कॉरपोरेशन को पत्र भेजने का निर्णय लिया गया है। पत्र भेजे जाने के बाद विद्युत विभाग की ओर से आवश्यक अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संभावित हादसे से पहले विद्युत पोल को सुरक्षित कर लिया जाएगा? मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में खतरे की जद में खड़े इस पोल पर तत्काल कार्रवाई बेहद जरूरी दिखाई दे रही है।
🔙 FLASH BACK : रविवार को भूस्खलन से बंद हो गई थी क्वारब–चौंसली लिंक रोड
गौरतलब है कि रविवार को अल्मोड़ा–हल्द्वानी हाईवे पर यात्रियों की मुश्किलें उस समय फिर बढ़ गई थीं, जब क्वारब के पास बनाई गई वैकल्पिक क्वारब–चौंसली (डोबा–चौंसली) लिंक रोड भारी भूस्खलन और मलबा आने से पूरी तरह बंद हो गई थी।
रविवार शाम अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरे थे। इसके बाद यातायात पूरी तरह ठप हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मौके पर फंसे यात्रियों और पर्यटकों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी।
दरअसल, अल्मोड़ा–हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर क्वारब पुल के समीप पहाड़ी के ट्रीटमेंट का काम चल रहा है। इसी कारण करीब तीन किलोमीटर लंबी डोबा–चौंसली लिंक रोड को वैकल्पिक यातायात मार्ग के रूप में संचालित किया गया है। लेकिन लगातार बारिश के बीच अब इस वैकल्पिक सड़क की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
रविवार को दिनभर मार्ग पर कई बार छोटे-छोटे भूस्खलन हुए। प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से मलबा हटाकर समय-समय पर यातायात सुचारु कराया गया, लेकिन शाम के समय भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आने के बाद मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था।
करोड़ों की आवाजाही का विकल्प, बारिश शुरू होते ही सामने आने लगी कमजोरियां
लोगों की आवाजाही सुचारु रखने के उद्देश्य से हाल में लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड ने वैकल्पिक सड़क के लगभग 1.3 किलोमीटर हिस्से का सुधारीकरण कराया था। सड़क की कटिंग, सोलिंग और डामरीकरण पर भारी धनराशि खर्च की गई, ताकि अल्मोड़ा और हल्द्वानी के बीच यातायात सुरक्षित और सुगम बना रहे।
इसके बावजूद बारिश शुरू होते ही लिंक रोड की कमजोरियां सामने आने लगी हैं। कई स्थानों पर जमीन धंसने और लगातार भूस्खलन से मार्ग जोखिम भरा बना हुआ है। अब इसी मार्ग पर गिरने की कगार पर खड़ा विद्युत पोल नई चिंता बन गया है।
एक ओर रामगाढ़ पुल की क्षतिग्रस्त विंग वॉल के चलते भारी वाहनों को डायवर्ट किया गया है, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक मार्गों पर भूस्खलन और विद्युत पोल जैसे खतरे सामने आ रहे हैं। मानसून के बीच अल्मोड़ा–हल्द्वानी मार्ग पर सफर करने वालों के लिए प्रशासनिक निर्देशों का पालन और अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।
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