अवैध मछली शिकार कर रहे लोगों से हुआ था विवाद
जनता का यही सवाल, ‘बेवजह कौन करता है आत्महत्या’
अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार…
सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे पर स्थित सुयालबाड़ी/गंगरकोट के समीप प्रसिद्ध गुप्तेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पूरी घटना को संदेहास्पद बना दिया है। प्रथम दृष्टया आत्महत्या माने जा रहे इस मामले के पीछे अब एक गहरी साजिश की बू आ रही है। स्थानीय लोगों के दावों और हालिया घटनाक्रमों ने पुलिस प्रशासन की तफ्तीश का रुख मोड़ दिया है।

घटना की कड़ियाँ बीते गुरुवार से जुड़ती नज़र आ रही हैं। बताया जा रहा है कि महंत कृष्णा गिरि का मंदिर के पास से बहने वाली कोसी नदी में अवैध रूप से मछली पकड़ रहे कुछ युवकों के साथ तीखा विवाद हुआ था। कुछ अराजक तत्व नदी के पानी में बिजली का करंट लगाकर मछलियों का शिकार कर रहे थे। पर्यावरण और जीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील बाबा ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी थी कि मंदिर परिसर के आसपास के क्षेत्र में मछली मारना पूर्णतः प्रतिबंधित है। बाबा की इस टोका-टाकी पर शिकारियों ने उनसे अभद्रता की और विवाद बढ़ गया।
पुलिस की दखल और माफीनामे का घटनाक्रम
बताया जा रहा है कि महंत कृष्णा गिरि ने इस अवैध गतिविधि और विवाद की सूचना तत्काल पुलिस को दी थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नदी में करंट लगाकर पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रहे लोगों को रंगे हाथों पकड़ा। पुलिस ने न केवल उन्हें कड़ी फटकार लगाई, बल्कि मौके पर ही सबसे लिखित माफीनामा भी भरवाया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारी मदन जीना और रमेश सुयाल समेत कई अन्य स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद थे। माना जा रहा है कि इस सार्वजनिक अपमान से आरोपी पक्ष महंत से रंजिश रखने लगा था।
संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से झूलता मिला शव
विवाद के अगले ही दिन यानी शुक्रवार को क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब महंत कृष्णा गिरि का शव मंदिर परिसर में फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया। जिस व्यक्ति ने एक दिन पहले दबंगई से अवैध शिकारियों का सामना किया और उन्हें कानून का पाठ पढ़ाया, उसकी अचानक मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब इस ‘रंजिश वाले एंगल’ पर गंभीरता से विचार कर रही है कि क्या विवाद के बाद उन लोगों ने बाबा को किसी तरह से प्रताड़ित किया या आत्महत्या के लिए उकसाया।
फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
मामले की गंभीरता को देखते हुए चौकी इंचार्ज ने बताया कि फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है और आवश्यक साक्ष्य जुटाकर टीम नैनीताल रवाना हो गई है। हालांकि, प्रारंभिक जांच और घटनास्थल के हालात को देखते हुए पुलिस अभी इसे आत्महत्या का मामला मानकर चल रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और समय का स्पष्ट पता चल सकेगा।
जनमानस में आक्रोश और निष्पक्ष जांच की मांग
महंत की मौत के बाद सुयालबाड़ी क्षेत्र के निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। स्थानीय जनता का स्पष्ट कहना है कि वे लंबे समय से कृष्णा गिरि महाराज के संपर्क में थे और वह एक दृढ़ इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति थे। ग्रामीणों के अनुसार, बाबा कभी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते थे। लोगों का तर्क है कि यदि उन्होंने ऐसा किया भी है, तो इसके पीछे निश्चित रूप से कोई बड़ी वजह या भारी दबाव रहा होगा। क्षेत्रवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मछली विवाद वाले कोण की सूक्ष्मता से जांच की जाए और दोषियों को बेनकाब किया जाए।
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