➤ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व मानवाधिकार आयोग के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता शिविर

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर: उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में विकास भवन सभागार में दो दिवसीय मानवाधिकार संरक्षण एवं सुशासन के संवेदनीकरण पर परिवादों की सुनवाई एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दूसरे दिन मानवाधिकार, विधिक अधिकारों एवं विभिन्न सामाजिक विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।
कार्यक्रम का संचालन शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गोविंद बल्लभ उपाध्याय ने किया। इस दौरान बाल विवाह, नालसा डान योजना और विभिन्न विधिक प्रावधानों की जानकारी दी गई। रिटेनर अधिवक्ता त्रिलोक चंद्र जोशी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की गतिविधियों, धारा-12 के अंतर्गत निःशुल्क कानूनी सहायता, नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 तथा देवभूमि में बुजुर्गों का मान अभियान के तहत वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की जानकारी साझा की। असिस्टेंट हेम चंद्र सिंह राणा ने नालसा की विभिन्न योजनाओं और विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों के बारे में विस्तार से बताया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनीता कुमारी ने घरेलू हिंसा अधिनियम, बाल विवाह, दहेज प्रथा, मानवाधिकार, मूल अधिकार, बाल श्रम, जेजे एक्ट, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम-2013, पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट तथा महिला पीड़ितों एवं उत्तरजीवियों के लिए नालसा मुआवजा योजना-2020 के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने जलवायु परिवर्तन, जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं तथा मानव जीवन पर उनके प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम-1993 की जानकारी देते हुए कहा कि समाज में मानवाधिकार और सुशासन के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। विभिन्न समस्याओं को लेकर करीब 40 लोगों ने अपने परिवाद और आवेदन प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने बताया कि प्राप्त आवेदनों के निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।


