✿ विधायक मनोज तिवारी बोले: ‘समस्याओं के समाधान को रहूंगा तत्पर’
✿ डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन का जिला स्तरीय द्विवार्षिक अधिवेशन
✿ मुट्ठी की तर्ज पर एकजुटता ही संगठन की ताकत: धीरेंद्र पाठक


सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, जनपद शाखा अल्मोड़ा का नवम् द्विवार्षिक अधिवेशन रविवार को यहां बेस चिकित्सालय से सटे फार्मेसी सदन में धूमधाम से आयोजित हुआ। जिसमें फार्मासिस्टों (फार्मेसी अधिकारियों) के संवर्ग की तमाम समस्याएं जोरशोर से उठीं। वहीं समस्याओं के निराकरण, अधिकारों के संरक्षण और विसंगतियों को मिटाने के लिए फार्मेसी अधिकारियों से मुट्ठी के रूप में एक रहने का आह्वान किया गया। मुख्य अतिथि विधायक मनोज तिवारी ने संवर्ग की समस्याओं का निदान करवाने के लिए सदैव तत्पर रहने का पूर्ण भरोसा दिलाया।

मुख्य अतिथि विधायक मनोज तिवारी व विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर अधिवेशन का शुभारंभ किया। इसके बाद अतिथियों का बैच अलंकरण कर स्वागत किया गया। वहीं मुख्य अतिथि तिवारी ने 8 लाख रुपये की विधायक निधि से निर्मित फार्मेसी सदन के प्रथम तल की छत का अनावरण कर संघ को समर्पित किया गया। अधिवेशन में विधायक ने कहा कि वे हमेशा फार्मेसी अधिकारी संवर्ग की समस्याओं का निदान करवाने के लिए तत्पर रहेंगे। विशिष्ट अतिथि प्रांतीय अध्यक्ष सुधा कुकरेती ने कहा कि फार्मेसी अधिकारियों की प्रदेश स्तरीय सभी समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश इकाई लगातार प्रयासरत है और शासन स्तर पर वार्ता में कई समस्याओं के समाधान का आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि पिछले साल के चारधाम यात्रा के बिलों के भुगतान के लिए भी दबाव बनाया गया। फलस्वरूप दो-तीन दिन में तत्संबंधी आदेश जारी होने की पूरी उम्मीद है। विशिष्ट अतिथि सीएमओ डा. अरविंद पांगती ने कहा कि संगठन की जिला स्तर की समस्याओं के निदान का हरसंभव प्रयास किया जाएगा और प्रांत स्तरीय मांगों को अग्रसारित किया जाएगा।
संगठन के प्रांतीय महामंत्री सतीश पांडे ने संगठन की समस्याओं व मांगों की तरफ ध्यान खींचा। खासकर उन्होंने कहा कि आईपीएचएस लागू होने से फार्मासिस्टों के खत्म हुए पदों की तरफ मुख्य अतिथि विधायक का ध्यान खींचा। पूर्व प्रांतीय महामंत्री सीएस महरा ने फार्मासिस्ट संवर्ग के लिए अपनाए जा रहे दोहरे मापदंडों की तरफ ध्यान खींचा। इसके लिए उन्होंने संवर्ग के कार्मिकों से एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने की बात कही। वहीं मंडलीय अध्यक्ष गजेंद्र पाठक ने संगठन की एकता पर बात रखी और उन्होंने कहा कि जब तक संगठन के सभी सदस्य एक मुट्ठी की तर्ज पर एक नहीं रहेंगे, तो संघर्ष की सफलताओं व अधिकारों के संरक्षण में अटकलें लगी रहेंगी। उन्होंने कहा कि एकजुटता ही संगठन की सफलता है। अन्य वक्ताओं ने भी संवर्ग की मांगों पर चर्चा की और संगठन में एकजुटता पर जोर दिया। जिलाध्यक्ष डीके जोशी ने अध्यक्षता करते हुए सभी अतिथियों का सहयोग के लिए आभार जताया और संगठन के प्रयासों पर बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अरविंद पांगती का समस्याओं के निराकरण में पूर्ण सहयोग मिल रहा है। इसके लिए उन्होंने सीएमओ का आभार भी जताया। अधिवेशन का संचालन जिला मंत्री रजनीश जोशी ने किया। उन्होंने संगठन का मांग पत्र भी अतिथियों के समक्ष पढ़ा।
✿ अधिवेशन में ये रही खास उपस्थिति
उक्त के अलावा विशिष्ट अतिथियों में प्रदेश महामंत्री डा. सतीश पांडे, प्रांतीय उपाध्यक्ष डीपी जोशी, मंडलीय सचिव प्रेम शंकर सिंह, मंडलीय कोषाध्यक्ष दिगंबर रावत, हीरा सिंह परिहार, पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन के अध्यक्ष मनोज जोशी आदि रहे। इनके अलावा वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष जेपीएस मनराल, उपाध्यक्ष गोपाल सिंह, संयुक्त मंत्री ललित नेगी, जिला कोषाध्यक्ष कैलाश चंद्र पपनै, संप्रेक्षक माया पांडे, पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष जीएस कोरंगा, आनंद पाटनी, आरपी भट्ट, पूर्व प्रदेश संगठन मंत्री टीआर रौथाण, पूर्व प्रांतीय उपाध्यक्ष गोकुल मेहता, नवीन चंद्र जोशी, पूनम अधिकारी, महेश पुजारी, कैलाश जोशी, दीपा जोशी, प्रभा कबडवाल, तारा सिंह, जितेंद्र देवड़ी, श्याम लाल, संजय प्रकाश, बीसी वर्मा, गणेश पंत, जयपाल सिंह नयाल, गणेश बुधोड़ी, राजकुमार, आनंद बल्लभ, जगदीश चंद्र, चंपा आर्या, नेहा बिष्ट, मीना नेगी, मनीषा हर्बोला, पूरन सिंह नेगी, केएस अधिकारी, योगेश गोस्वामी, एचसी जोशी, एपी खंतवाल, शिवचरण, अर्चना मिश्रा, अनोप सिंह, पूरन पवार आदि मौजूद रहे।

शीतलाखेत मॉडल पर गजेंद्र पाठक सम्मानित
अल्मोड़ा: डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन, अल्मोड़ा के जिला अधिवेशन में संगठन के मंडलीय अध्यक्ष एंव शीतलाखेत मॉडल के संयोजक गजेंद्र पाठक सम्मानित हुए। उन्हें मुख्य अतिथि अल्मोड़ा के विधायक मनोज तिवारी, संगठन की प्रांतीय अध्यक्ष सुधा कुकरेती व प्रांतीय सचिव सतीश पांडे ने सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें संगठन के कार्यों के लिए नहीं बल्कि उनके चर्चित शीतलाखेत मॉडल के लिए दिया गया। इस मॉडल के तहत गजेंद्र पाठक ने पर्यावरण संरक्षण की उल्लेखनीय पहल की है। इसके लिए वह दो दशकों से कार्य कर रहे हैं। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण की चेतना जगाने में खासा योगदान मिला है। उनके शीतलाखेत मॉडल को वनाग्नि की रोकथाम के लिए राज्य सरकार ने भी स्वीकारा है।


