आर्य समाज अल्मोड़ा ने जताई खुशी, कहा— पूरे संगठन के लिए गर्व की बात
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य सरकार ने पशु कल्याण बोर्ड के नए सदस्यों का मनोनयन कर दिया है। सरकार द्वारा जारी इस नवीनतम सूची में अल्मोड़ा के प्रसिद्ध समाजसेवी और गौ सेवक दयाकृष्ण काण्डपाल को भी बोर्ड का सदस्य मनोनीत किया गया है। दयाकृष्ण काण्डपाल पिछले 15 वर्षों से ज्योली स्थित गौशाला के संचालक के रूप में निराश्रित गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार धरातल पर काम कर रहे हैं। उनके इस मनोनयन से जनपद के सामाजिक संगठनों और पशु प्रेमियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।


दयाकृष्ण काण्डपाल को सरकार द्वारा इतनी बड़ी और नवीन जिम्मेदारी सौंपे जाने पर आर्य समाज अल्मोड़ा में हर्ष की लहर दौड़ गई है। इस खास मौके पर आर्य समाज अल्मोड़ा के प्रधान दिनेश चन्द्र तिवारी, मोहन सिंह रावत, अर्जुन सिंह, गौरव भट्ट, किशन सिंह और सुखलाल समेत संगठन के तमाम पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रसन्नता व्यक्त की है। संगठन के इन प्रमुख लोगों द्वारा दूसरे पैराग्राफ में विशेष रूप से यह बताया गया है कि दयाकृष्ण काण्डपाल की यह नियुक्ति न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का सम्मान है, बल्कि पूरे आर्य समाज संगठन के लिए भी एक अत्यंत गर्व का विषय है।
सड़कों पर घूमते निराश्रित गौवंश और जंगली जानवरों की दहशत पर चिंता
आर्य समाज अल्मोड़ा के प्रधान दिनेश चन्द्र तिवारी ने वर्तमान स्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए काण्डपाल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां एक तरफ आम लोग अपने गौवंश को अनुपयोगी समझकर सड़कों पर लावारिस छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जंगली जानवर भी जंगलों से निकलकर इंसानी आबादी में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे चारों तरफ दहशत का माहौल बना हुआ है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में दयाकृष्ण काण्डपाल को इस आयोग में शामिल किया जाना पशु कल्याण की दिशा में एक बेहद सकारात्मक कदम साबित होगा।
पशु कल्याण बोर्ड के नवनियुक्त सदस्य दयाकृष्ण काण्डपाल ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए राज्य सरकार और आयोग का सहृदय आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित इस नई कार्यकारिणी में राज्य के कई विद्वान और अनुभवी सदस्यों को शामिल किया गया है। वह भाग्यशाली हैं कि उन्हें ऐसे प्रबुद्ध लोगों के साथ काम करने का अवसर मिला है और सभी सदस्य मिलकर उत्तराखंड में पशु कल्याण के हितों से जुड़े हर गंभीर मुद्दे पर ठोस रणनीति तैयार करेंगे।
बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर अपना दृष्टिकोण रखते हुए दयाकृष्ण काण्डपाल ने कहा कि जंगली जानवरों को जंगलों की सीमा के भीतर ही सीमित रखने के लिए प्रदेश में ‘मिश्रित वनों’ का होना बेहद आवश्यक है। जंगलों में केवल बड़े पेड़ ही नहीं, बल्कि फलदार वृक्षों के साथ-साथ झाड़ीदार पौधे भी बड़े पैमाने पर लगाए जाने जरूरी हैं। वर्तमान समय में वनों में लगातार लग रही आग और वन्यजीवों के प्राकृतिक भोज्य पदार्थों (भोजन और पानी) की भारी कमी के कारण ही जंगली जानवर अपनी सीमाएं लांघकर आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने को मजबूर हो रहे हैं।
वैज्ञानिक प्रबंधन से आत्मनिर्भर और लाभकारी बनेगा निराश्रित गौवंश
]सड़कों पर घूम रहे बेसहारा और निराश्रित गौवंश की गंभीर समस्या का समाधान सुझाते हुए दयाकृष्ण काण्डपाल ने एक बड़ा विजन सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संकट को रोकने के लिए गौ-मूत्र और गोबर के वैज्ञानिक प्रबंधन (Scientific Management) पर काम करना होगा। यदि वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से इनसे जैविक खाद, कीटनाशक और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाए जाएं, तो इन अनुपयोगी समझे जाने वाले पशुओं को भी पूरी तरह से आत्मनिर्भर और लाभकारी बनाया जा सकता है। इससे सड़कों पर गौवंश की दुर्दशा भी रुकेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।


