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बागेश्वर में बारिश का कहर: चरमराई बिजली व्यवस्था, अंधेरे में डूबे कई इलाके

नर्सरी के पास शॉर्ट सर्किट से मची अफरा-तफरी

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : जनपद में पिछले कुछ दिनों से हो रही वर्षा ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बारिश के कारण जिले की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। रविवार की रात से शुरू हुआ बिजली कटौती का सिलसिला सोमवार सुबह तक जारी रहा, जिसने ऊर्जा निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिले के कई हिस्सों में पूरी रात अंधेरा छाया रहा, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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कांडा रोड स्थित नर्सरी के समीप रविवार देर रात एक बड़ा हादसा होते-होते टला। अचानक बिजली के तारों में भीषण आग लग गई और जलते हुए तार सड़क पर आ गिरे। इस घटना से मार्ग पर आवागमन कर रहे लोगों में भगदड़ मच गई। विशेष रूप से वहां से गुजर रही बारातियों की कई गाड़ियां फंस गईं और काफी देर तक दहशत का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों ने ऊर्जा निगम के अधिकारियों को फोन करने का प्रयास किया, लेकिन देर रात होने के कारण किसी ने फोन रिसीव नहीं किया।

पुलिस और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा

ऊर्जा निगम से संपर्क न हो पाने की स्थिति में सजग नागरिकों ने आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना दी। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। अग्निशमन दल ने तत्परता दिखाते हुए सड़क पर पड़े जलते हुए तारों को हटाया और खतरे को दूर किया, जिसके बाद ही यातायात सामान्य हो सका। विभाग की इस सुस्ती को लेकर जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

घंटों गुल रही चौरासी और भागीरथी क्षेत्र की बत्ती

विद्युत संकट का असर जिले के अन्य हिस्सों में भी व्यापक रूप से देखा गया। चौरासी क्षेत्र में रात करीब तीन बजे से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप रही। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद घंटों तक विभाग की ओर से कोई सुध नहीं ली गई। इसी प्रकार भागीरथी क्षेत्र में भी रात भर लोग अंधेरे में रहने को मजबूर रहे, जिससे दैनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुए।

मुख्यालय के पास होकर भी अंधेरे में बालीघाट-दारसौं

हैरानी की बात यह है कि जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित बालीघाट-दारसौं क्षेत्र पिछले तीन मई से बिजली की किल्लत झेल रहा है। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि मुख्यालय के इतने समीप होने के बावजूद विभाग उनकी समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। तीन दिनों से आपूर्ति सुचारू न होना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्थायी समाधान की उठी मांग

बार-बार हो रही बिजली कटौती और विभाग की लापरवाही से त्रस्त क्षेत्रवासियों ने अब शासन-प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि मानसूनी सीजन अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है और व्यवस्थाएं अभी से ध्वस्त हैं। उन्होंने ऊर्जा निगम से जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल करने और जर्जर लाइनों के स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।

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