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BIG BREAKING: 9 दिनों की तलाश का दर्दनाक अंत, मासूम पंकू का मिला शव

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‘फ्लैशबैक’ की वो कहानी जो रुला देगी

वन विभाग पर भी उठे सवाल

CNE REPORTER, रुद्रप्रयाग (क्यूंजा घाटी) | उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग से आ रही खबर ने आज न केवल मानवता को शर्मसार किया है, बल्कि देवभूमि के शांत पहाड़ों में दहशत भर दी है। क्यूंजा घाटी के बाड़़व मल्ला गांव से 4 अप्रैल को लापता हुए 5 वर्षीय पंकू का शव आज बरामद हो गया है।

लेकिन यह अंत जितना दुखद है, इस कहानी की शुरुआत उतनी ही मार्मिक थी।

वह काली दोपहर जब पंकू अपनी मां के पीछे निकला था

घटना की पड़ताल करने पर वह मंजर सामने आता है जिसने एक मासूम को मौत की आगोश में धकेल दिया:

  • तारीख और समय: 4 अप्रैल, दोपहर करीब 2:30 बजे।
  • क्या हुआ था: पंकू के पिता विजय लाल पास के ही खेत में हल चलाने गए थे। दोपहर के समय उसकी मां, मनसा देवी, पति के लिए भोजन लेकर घर से निकलीं।
  • अंतिम बार कब दिखा: ग्रामीणों के अनुसार, छोटा पंकू अपनी मां के पीछे-पीछे रोते हुए घर से बाहर निकल गया था। मां इस बात से अनजान थी कि उसका लाडला उसके पीछे आ रहा है। जब मां खेत से वापस लौटी, तो घर में सन्नाटा था। पंकू गायब हो चुका था।

सर्च ऑपरेशन: पूरी रात जागता रहा गांव

जैसे ही बच्चे के लापता होने की खबर फैली, पूरे क्यूंजा घाटी में हड़कंप मच गया।

  1. ग्रामीणों की मुहिम: जिला पंचायत सदस्य अजयवीर सिंह भंडारी के नेतृत्व में पूरी रात ग्रामीण मशालें जलाकर जंगलों में बच्चे को ढूंढते रहे।
  2. प्रशासनिक मुस्तैदी: सूचना मिलते ही पुलिस, SDRF और वन विभाग की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाला। सघन सर्च अभियान चलाया गया, लेकिन घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के कारण पंकू का सुराग नहीं मिल पा रहा था।

आज की स्थिति: 9 दिनों का इंतजार ‘शव’ पर आकर रुका

9 दिनों तक चली जद्दोजहद और दुआओं का दौर आज तब खत्म हुआ जब गांव के समीपवर्ती जंगल में पंकू का बेजान शरीर मिला। शव की हालत देखकर स्थानीय लोग स्तब्ध हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

जांच के अहम सवाल (The Big Questions):

  • जंगली जानवर या कुछ और? क्या मासूम को किसी गुलदार या अन्य जंगली जानवर ने अपना निवाला बनाया, या वह जंगल में रास्ता भटकने के कारण भूख-प्यास और ठंड की भेंट चढ़ गया?
  • सुरक्षा पर सवाल: वन विभाग की मौजूदगी के बावजूद क्या यह क्षेत्र सुरक्षित नहीं है?
  • अंतिम रिपोर्ट का इंतजार: शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट से साफ होगा कि मासूम की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई।

पूरे क्षेत्र में पसरा मातम

बाड़़व मल्ला गांव के हर घर में आज चूल्हा नहीं जला है। मां मनसा देवी और पिता विजय लाल की स्थिति देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह एक ऐसी अनहोनी है जिसने पहाड़ों की सुरक्षा और बच्चों की निगरानी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन की अपील: पुलिस ने क्षेत्रवासियों से संयम बरतने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि जांच में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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