वैश्विक मंच पर मिला सम्मान
ऋषिकेश/अल्मोड़ा। अंतरराष्ट्रीय योग की वैश्विक राजधानी ऋषिकेश में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव’ में उत्तराखंड का मान बढ़ा है। मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा के अधीन बेस अस्पताल में कार्यरत नागेंद्र प्रसाद जोशी को योग के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान और समाज को योग से जोड़ने के प्रयासों के लिए प्रतिष्ठित ‘इंटरनेशनल योग अवार्ड‘ से सम्मानित किया गया है।

उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित इस भव्य महोत्सव में दुनिया के 90 देशों के योग व आध्यात्मिक गुरुओं, साधकों और योग प्रेमियों ने शिरकत की। खास बात यह रही कि इस अवसर पर करीब 30 देशों के एंबेसडर्स और हाई कमिश्नर्स भी मौजूद रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति में नागेंद्र को इस सम्मान से नवाजा गया।
योग की विरासत और समर्पण
नागेंद्र प्रसाद जोशी का योग से नाता काफी पुराना और गहरा है। उनके दादा, स्व. लोकमणि जोशी, अपने समय के प्रख्यात महायोगी थे। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नागेंद्र वर्ष 1997 से निरंतर योग साधना और प्रचार-प्रसार में जुटे हैं। उन्होंने देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से योग का गहन अध्ययन किया है।
नि:शुल्क सेवा और ‘ॐ आनंदम् पीठम् फाउंडेशन’
नागेंद्र की सबसे बड़ी विशेषता उनका नि:स्वार्थ सेवा भाव है। वे अपने स्वयं के खर्च पर योग शिविरों का आयोजन करते हैं। उनकी सेवाओं का दायरा अत्यंत विस्तृत है:
- शैक्षणिक संस्थान: स्कूल और कॉलेजों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण।
- स्वास्थ्य एवं सुधार: अस्पतालों और जेलों में योग के माध्यम से सकारात्मकता का संचार।
- मेडिकल शिक्षा: मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं को भी वे नियमित योग सिखा रहे हैं।
- संस्थागत प्रयास: योग को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से उन्होंने “ॐ आनंदम् पीठम् फाउंडेशन” की स्थापना की है।
“यह सम्मान मेरे गुरु अंतरराष्ट्रीय योग गुरु स्वामी जीतानन्द जी महाराज के आशीर्वाद और उन सभी विद्वानों के सानिध्य का परिणाम है, जिनसे मुझे योग सीखने का सौभाग्य मिला।” — नागेंद्र प्रसाद जोशी
क्षेत्र में खुशी की लहर
नागेंद्र को इससे पूर्व भी योग के क्षेत्र में कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सम्मान मिल चुके हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस उपलब्धि ने अल्मोड़ा सहित पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उनकी इस सफलता पर जनपद के गणमान्य व्यक्तियों और सहयोगियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।


