सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा में आज शनिवार को उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) द्वारा देवभूमि के पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान दल के पदाधिकारियों ने न केवल त्योहार की खुशियां बांटी, बल्कि विलुप्त होती पहाड़ी संस्कृति के संरक्षण का संकल्प भी दोहराया।
सिद्धि नौले से शुरू हुआ खुशियों का कारवां
उत्सव का शुभारंभ ऐतिहासिक सिद्धि नौले से हुआ। यहाँ से यूकेडी कार्यकर्ता नन्हे-मुन्ने बच्चों की टोली के साथ पारंपरिक गीतों और ‘फूल देई-छम्मा देई’ के मंगल उद्घोष के साथ नगर भ्रमण पर निकले। बच्चों ने स्थानीय मंदिरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों की देहरी पर रंग-बिरंगे पुष्प और अक्षत अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
जनजागरण और संस्कृति का संरक्षण
कार्यक्रम के दौरान यूकेडी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय लोगों और व्यापारियों को आगामी बिटौली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता की चकाचौंध में उत्तराखंड के अनमोल लोकपर्व धीरे-धीरे ओझल हो रहे हैं। दल द्वारा इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और लोक संस्कृति के प्रति जनजागरण करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में यूकेडी जिला अध्यक्ष दिनेश जोशी, महानगर अध्यक्ष मोहित साह, जिला कार्यकारी अध्यक्ष पान सिंह लटवाल, महिला जिला अध्यक्ष दीपा जोशी, केंद्रीय मंत्री गिरीश नाथ गोस्वामी, युवा प्रकोष्ठ केंद्रीय संगठन मंत्री नरेंद्र सिंह बिष्ट, गणेश सिंह, सोनू नेगी, किरन मेहरा, दिवेश जोशी, कुंज नाथ, पवन सिंह, पुष्कर सिंह सहित कई कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।


