92,700 टन LPG लेकर भारत की ओर बढ़े ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’
— दुनिया की जंग के बीच भारतीय रसोई के लिए राहत
नई दिल्ली/वैश्विक डेस्क। मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने भारत के करोड़ों घरों की रसोई को राहत दी है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी महायुद्ध के बीच दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते Strait of Hormuz से भारत के दो गैस जहाज सुरक्षित निकल आए हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
भारतीय झंडे वाले LPG कैरियर “शिवालिक” और “नंदा देवी” करीब 92,700 टन एलपीजी गैस लेकर भारत आ रहे हैं और अगले दो-तीन दिनों में गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंच सकते हैं।
ये जहाज गुजरात के प्रमुख बंदरगाह Mundra Port और Kandla Port पर पहुंचेंगे। इनकी सुरक्षित यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मिडिल ईस्ट की जंग के बाद कई जहाज इसी समुद्री मार्ग में फंस गए थे और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर संकट गहरा गया था।
बताया जा रहा है कि इस संवेदनशील रास्ते पर इन जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना भी सतर्क रही और कूटनीतिक स्तर पर भी लगातार बातचीत चलती रही।
क्यों अहम है यह खबर — भारत की रसोई से जुड़ा है यह समुद्री रास्ता
दुनिया के कुल समुद्री तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।
भारत के लिए यह रास्ता और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- भारत की बड़ी मात्रा में LPG खाड़ी देशों से आती है
- तेल और गैस के कई टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं
- जंग के बाद करीब दो दर्जन से ज्यादा जहाज इस क्षेत्र में फंस गए थे
यही वजह है कि जब यह खबर आई कि भारतीय जहाज सुरक्षित निकल आए हैं, तो इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।
दिल्ली में होटल अब कचरे से बने ईंधन से चलेंगे
इसी ऊर्जा संकट के असर अब भारत के शहरों में भी दिखने लगे हैं। राजधानी दिल्ली में होटल-रेस्टोरेंट और उद्योगों को अस्थायी रूप से नेचुरल गैस की जगह कचरे से बने ईंधन का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी गई है।
यह फैसला Commission for Air Quality Management के निर्देश पर लागू किया गया है।
अब दिल्ली-एनसीआर के कई होटल और उद्योग RDF (Refuse Derived Fuel) पेलेट्स का इस्तेमाल करेंगे।
क्या है RDF?
RDF यानी Refuse Derived Fuel — यह शहर के सूखे कचरे से बनाया गया ईंधन होता है।
इसमें शामिल होते हैं:
- प्लास्टिक
- कागज
- लकड़ी
- कपड़ा
इन्हें प्रोसेस करके छोटे-छोटे पेलेट्स बनाए जाते हैं जिन्हें औद्योगिक भट्टियों और बॉयलरों में जलाया जा सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम न केवल गैस की खपत कम करेगा बल्कि दिल्ली के कचरे के पहाड़ कम करने में भी मदद करेगा।
पाकिस्तान में संकट, वेतन तक काटने पड़े
ऊर्जा संकट का सबसे बड़ा असर पड़ोसी देश Pakistan में दिखाई दे रहा है।
प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों की सैलरी में 5% से 30% तक कटौती का फैसला लिया है।
सरकार ने
- सरकारी गाड़ियों के ईंधन में 50% कटौती
- नई सरकारी खरीद पर रोक
- विदेश यात्राओं पर प्रतिबंध
जैसे कठोर कदम भी उठाए हैं।
अमेरिका में भी पेट्रोल महंगा
युद्ध का असर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था United States पर भी पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 3.68 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद लगभग 23 प्रतिशत ज्यादा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर जल्द ही
- हवाई यात्रा
- खाद्य पदार्थ
- शिपिंग लागत
पर भी दिख सकता है।
सत्ता बदलने की आहट: ईरान के क्राउन प्रिंस का बयान
इसी बीच ईरान की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने कहा है कि अगर मौजूदा सरकार गिरती है तो वह देश की बागडोर संभालने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने दावा किया कि एक अंतरिम शासन व्यवस्था पर पहले से काम चल रहा है।
विश्लेषण: जंग 3 हजार किलोमीटर दूर, असर भारत की रसोई तक
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग भारत से करीब 3000 किलोमीटर दूर है, लेकिन उसका असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई तक महसूस किया जा रहा है।
अगर यह संघर्ष लंबा चला तो:
- LPG सिलेंडर महंगे हो सकते हैं
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं
- होटल-रेस्टोरेंट की लागत बढ़ेगी
- वैश्विक व्यापार महंगा होगा
लेकिन फिलहाल होर्मुज से भारतीय जहाजों का सुरक्षित निकलना यह संकेत देता है कि भारत ने कूटनीति और रणनीति के दम पर अपनी ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
अलबत्ता कहा जा सकता है कि मिडिल ईस्ट की जंग में जहां मिसाइलें और ड्रोन चल रहे हैं, वहीं उसी रास्ते से गुजरते भारतीय जहाज करोड़ों घरों की रसोई को राहत देने के लिए भारत की ओर बढ़ रहे हैं।


