भड़के लोग—क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा वन विभाग?
ल्मोड़ा। जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम रेंगल में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज सुबह एक व्यक्ति गुलदार के हमले में बाल-बाल बच गया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए तत्काल पिंजरा लगाने की माँग की है।
घटना का विवरण: घर के पास ही घात लगाकर बैठा था गुलदार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज बृहस्पतिवार सुबह करीब 7:00 बजे गाँव के निवासी पप्पू राम (पुत्र मोहन राम) अपने घर से महज कुछ ही दूरी पर लघुशंका के लिए निकले थे। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाकर बैठे गुलदार ने उन पर अचानक हमला बोल दिया।
पप्पू राम की चीख-पुकार सुनकर उनके परिजन और पास के ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके की ओर दौड़े। ग्रामीणों द्वारा सामूहिक रूप से किए गए भारी शोर-शराबे के बाद गुलदार अपने शिकार को छोड़कर पास के घने जंगल की ओर भाग गया। गनीमत रही कि समय रहते मदद पहुँच गई, वरना कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
लंबे समय से ‘मवेशीखोर’ बना हुआ है गुलदार
इधर सामाजिक कार्यकर्ता विपिन गुरूरानी ने कहा कि रेंगल में लंबे समय से मवेशीखोर गुलदार का आतंक है। आए दिन वह इलाके में देखा जाता रहा है। ग्रामीणों को इस गुलदार से बहुत खतरा है। शाम 5 बजे के बाद लोगों का अकेले घर से निकलना दूभर हो चुका है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी सीएनई (CNE) के माध्यम से वन विभाग को मामले से अवगत कराया गया था, , लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की चेतावनी: “बड़ी जनहानि का न करें इंतज़ार”
गाँव के निवासी महेन्द्र सिंह, मोहन राम, भीम राम और किशन राम सहित अन्य ग्रामीणों ने आज की घटना की पुष्टि करते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार अब इंसानी बस्तियों के इतने करीब आ चुका है कि लोग अपने आंगन में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
प्रशासनिक सुस्ती भारी न पड़ जाए: स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद वन विभाग की टीम केवल मौका मुआयना कर लौट जाती है। अब जबकि गुलदार ने इंसान पर सीधा हमला कर दिया है, ग्रामीणों को डर है कि कहीं अगली बार स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए।


