वनाग्नि रोकने को आगे आए ग्रामीण, मानव-वन्यजीव संघर्ष पर मंथन

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उत्तरी गौला वन क्षेत्र के प्यूड़ा अनुभाग में क्षेत्र के समस्त वन पंचायत प्रतिनिधियों हेतु एक कार्यशाला
उत्तरी गौला वन क्षेत्र के प्यूड़ा अनुभाग में क्षेत्र के समस्त वन पंचायत प्रतिनिधियों हेतु एक कार्यशाला

वन विभाग ने जारी की ‘क्या करें, क्या न करें’ गाइडलाइन

CNE REPORTER : उत्तरी गौला वन क्षेत्र के प्यूड़ा अनुभाग में आयोजित एक दिवसीय विशेष कार्यशाला में वनाग्नि नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए जन-सहभागिता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वनाग्नि न केवल प्राकृतिक संपदा को नष्ट करती है, बल्कि वन्यजीवों को आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पलायन करने के लिए भी मजबूर करती है, जिससे संघर्ष की घटनाएं बढ़ती हैं। इस दौरान वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जंगलों को आग से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं और वन्यजीवों से बचाव के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें।


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पूर्वी प्यूड़ा बीट के जन-मिलन केंद्र में आयोजित इस संगोष्ठी में वनक्षेत्राधिकारी विजय चंद्र भट्ट ने ‘क्या करें और क्या न करें’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जंगलों में आग लगने के भयावह परिणाम होते हैं; इससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाता है और वे भोजन व शरण की तलाश में गांवों का रुख करते हैं। अचानक आमना-सामना होने पर अपनी सुरक्षा के लिए वन्यजीव हमला कर देते हैं।

इससे बचाव हेतु विभाग ने कुछ प्रमुख सुरक्षा उपाय साझा किए:

  • घरों और गौशालों के आसपास उगी झाड़ियों की नियमित सफाई करें।
  • रात्रि के समय घरों के बाहर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था रखें।
  • मवेशियों को सुरक्षित बाड़ों में बांधें और अकेले जंगल जाने से बचें।
  • किसी भी क्षेत्र में आग लगने की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।

1. वन पंचायत नियमावली 2024 पर चर्चा

कार्यशाला के दूसरे सत्र में वन क्षेत्राधिकारी ने वन पंचायत प्रतिनिधियों को वन पंचायत नियमावली 2024 में हुए नवीन संशोधनों की बारीकी से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत सरपंचों के अधिकारों और कर्तव्यों में क्या बदलाव आए हैं और किस तरह वे वनों के संरक्षण में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ब्लॉक प्रमुख रामगढ़ दीप चंद्र आर्या तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य ज्योति आर्या उपस्थित रहे, जिन्होंने जनता से विभाग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का आह्वान किया।


कार्यशाला में विभिन्न ग्रामों से आए जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। उपस्थित जनप्रतिनिधियों में रेखा बिष्ट ग्राम प्रधान बैरोली, निर्मला जीना ग्राम प्रधान कफूड़ा, भुवन चंद्र आर्या ग्राम प्रधान सिरसा, सरपंच संगठन अध्यक्ष कमल सुनाल, धर्मेन्द्र बिष्ट सरपंच प्यूड़ा, दीपा कबड़वाल सरपंच सतोली, भीम सिंह सरपंच बड़ेत, राकेश राणा सरपंच मौना, मीडिया प्रतिनिधि अनूप जीना तथा विभागीय कर्मचारियों में वन दरोगा बृजेश विश्वकर्मा, संजय टम्टा, वन आरक्षी वीरपाल सिंह, बिपिन बिष्ट, मनोज कैड़ा, दीवान सिंह, रोहित रैकुनी, धर्मानंद शर्मा, अग्नि श्रमिक नंदकिशोर, लालू आर्या और मोहन बिष्ट सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

समापन पर उपस्थित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने वनाग्नि रोकथाम और मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।