उत्तराखंड पेयजल निगम के आह्वान पर धरना शुरू
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर: उत्तराखंड पेयजल निगम के कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। पिछले तीन महीनों से वेतन का भुगतान न होने से नाराज कर्मचारियों ने शुक्रवार से कार्यस्थल पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के आह्वान पर शुरू हुए इस आंदोलन ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी आर्थिक और विभागीय मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।
धरने को संबोधित करते हुए समन्वय समिति के अध्यक्ष कैलाश सिंह ने कहा कि वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की स्कूल फीस, इलाज का खर्च और बैंक लोन की किस्तों का भुगतान न हो पाने के कारण कर्मचारी मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि पेयजल जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े होने के बावजूद कर्मचारी खुद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रमुख मांगें: आखिर क्या चाहते हैं कर्मचारी?
कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने स्पष्ट प्रस्ताव रखे हैं:
- राजकीय विभाग का दर्जा: समिति की सबसे बड़ी मांग है कि उत्तराखंड पेयजल निगम को पूर्ण रूप से राजकीय विभाग घोषित किया जाए। इससे वेतन और पेंशन की अनिश्चितता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
- कोषागार से भुगतान: जब तक राजकीय विभाग का दर्जा नहीं मिलता, तब तक वेतन और पेंशन का आहरण सीधे सरकारी कोषागार (Treasury) से सुनिश्चित किया जाए।
- सेंटेज व्यवस्था का अंत: वर्तमान सेंटेज व्यवस्था को समाप्त कर कार्मिकों के अधिष्ठान व्यय का एकमुश्त बजट प्रावधान किया जाए, जो सीधे सचिव के नियंत्रण में हो।
- नियत तिथि पर वेतन: प्रत्येक माह की पहली तारीख को वेतन और पेंशन का नियमित भुगतान सुनिश्चित हो।
शुक्रवार को हुए इस प्रदर्शन में विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी एकजुट नजर आए। धरने में मुख्य रूप से अधिशाषी अधिकारी विपिन कुमार, किशन सिंह, चंदन सिंह, नरेंद्र सिंह, चंद्रा देवी, मनोज खड़का, जयशंकर सिंह राणा, ललित सिंह कोरंगा, विनोद कुमार, लक्ष्मी कोरंगा और ज्योति कांडपाल सहित दर्जनों कर्मचारी शामिल रहे।
कर्मचारियों का कहना है कि वे जनहित में काम करना चाहते हैं, लेकिन खाली पेट सेवा करना अब उनके लिए संभव नहीं है। यदि सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप धारण कर सकता है।

