सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : Video Viral – उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से सटे ग्रामीण इलाकों में इन दिनों गुलदार (तेंदुए) ने चैन की नींद उड़ा दी है। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती क्षेत्रों में गुलदार अब सिर्फ रात ही नहीं, बल्कि दिनदहाड़े भी आबादी के बीच धमक रहा है। इसी बीच, गुलदार की सूचना पर पहुँचे वन कर्मियों और ग्रामीणों के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने मामले को और गर्मा दिया है।

इन क्षेत्रों में बना है डर का माहौल
गुलदार की सक्रियता मुख्य रूप से त्यूंरा और कफलखेत, सैंज और मजियाखेत, पालनीकोट और भटखोला में खासी दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार के दिन में दिखने से बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
शनिवार शाम को जब गुलदार की आहट के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों ने मौके पर किसी सक्षम उच्च अधिकारी को बुलाने की मांग की।
विवाद की मुख्य वजह:
- मौके पर मौजूद वन दरोगा और अन्य कर्मियों के साथ ग्रामीण बालकृष्ण की तीखी बहस हुई।
- बहस के दौरान एक वन कर्मी ने कथित तौर पर खुद को ‘क्षेत्र का वोटर’ बता दिया, जिससे ग्रामीण भड़क गए।
- इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
ताजा अपडेट: मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ (DFO) ने जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, रविवार को सोशल मीडिया से वह विवादित वीडियो हटा लिया गया है।
ग्रामीणों ने की पिंजड़ा लगाने की पुरजोर मांग
रविवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने एकजुट होकर वन विभाग को ज्ञापन सौंपा। उनकी स्पष्ट मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत पिंजड़ा लगाया जाए और गश्त बढ़ाई जाए ताकि किसी अनहोनी को रोका जा सके।
ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से विपिन चौधरी, संतोष पांडेय, सुमन चौधरी, तारा देवी, बालकृष्ण, राजा पांडेय, गंगा देवी, शोभा चौधरी, पुष्पा पांडेय और पुष्पा वर्मा आदि शामिल रहे।
बागेश्वर के इन गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति गंभीर होती जा रही है। एक ओर जहाँ गुलदार का खतरा है, वहीं दूसरी ओर विभाग और जनता के बीच बढ़ता अविश्वास चिंता का विषय है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक क्षेत्र में पिंजड़ा लगाकर ग्रामीणों को इस दहशत से निजात दिलाता है।

