सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हल्द्वानी स्थित ऐतिहासिक चारधाम मंदिर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। तड़के सुबह 4 बजे से ही मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दूर—दराज़ क्षेत्रों से आए श्रद्धालु और पर्यटक भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।
मंदिर परिसर ‘बम—बम भोले’ और ‘हर—हर महादेव’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। भक्तों में विशेष उत्साह और भक्ति का उल्लास स्पष्ट रूप से देखा गया। सुव्यवस्थित व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का विधि—विधान से पूजन किया और अपने परिवार की सुख—समृद्धि की कामना की।
सनातन परंपरा में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व
सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था। इसी कारण उत्तराखंड सहित पूरे देश के शिवालयों में इस दिन विशेष पूजा—अर्चना, रुद्राभिषेक और भजन—कीर्तन का आयोजन होता है।
हल्द्वानी के विभिन्न मंदिरों में भी सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी रही, लेकिन लामाचौड़ के निकट स्थित चारधाम मंदिर में आस्था का विशेष केंद्र देखने को मिला।
चारों धामों का प्रतिरूप: चारधाम मंदिर की विशेषता
चारधाम मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां उत्तराखंड के चारों पवित्र धाम —
- बद्रीनाथ
- केदारनाथ
- गंगोत्री
- यमुनोत्री
— के प्रतिरूप स्थापित हैं। यही कारण है कि इसे “चारधाम मंदिर” के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से चार धाम यात्रा के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
मंदिर समिति का वक्तव्य: आस्था और पर्यटन का संगम
मंदिर समिति के अध्यक्ष जमन सिंह निगल्टिया ने कहा कि उन्हें चारधाम मंदिर की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि चारों धामों में जाकर विधिवत देव प्रतिमाओं की स्थापना की गई है, जिससे यह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय—समय पर मंदिर परिसर का विकास किया गया है और भविष्य में भी कई महत्वपूर्ण कार्य प्रस्तावित हैं।
वहीं ग्राम प्रधान जयपुर पाडली कमल पडलिया ने कहा कि चारधाम मंदिर धार्मिक एवं ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और चारों धाम यात्रा के समान फल की प्राप्ति होती है।
प्रमुख गणमान्य रहे उपस्थित
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष जमन सिंह निगल्टिया, सचिव गोपाल दत्त पडलिया, उपाध्यक्ष रवि कुरिया, प्रधान पुजारी चंद्रशेखर जोशी, प्रमोद पलड़िया, भाष्कर पडलिया, कमल पडलिया सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर हल्द्वानी का चारधाम मंदिर भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत केंद्र बना रहा, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

