न्याय के पहरेदारों का फूटा गुस्सा, सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

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न्याय के पहरेदारों का फूटा गुस्सा, सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा
न्याय के पहरेदारों का फूटा गुस्सा, सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

नैनीताल और रामनगर में वकीलों का हल्लाबोल

अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी, जानें क्या हैं मांगें

CNE REPORTER, नैनीताल/रामनगर: उत्तराखंड के न्यायिक गलियारों में आज भारी उबाल देखने को मिला। नैनीताल जिला न्यायालय और रामनगर बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने अधिकारियों के कथित दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार और राजस्व न्यायालयों में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया।


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वकीलों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द अमल नहीं हुआ, तो 23 फरवरी से पूरे जिले में न्यायिक कामकाज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।


नैनीताल: फाइलों के गायब होने और दुर्व्यवहार पर गरमाए वकील

बुधवार, 11 फरवरी को नैनीताल जिला बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

  • मुख्य आरोप: वकीलों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों से महत्वपूर्ण फाइलें गायब हो रही हैं और जब अधिवक्ता इस संबंध में अधिकारियों से बात करने जाते हैं, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है।
  • गंभीर आरोप: बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवत प्रसाद और सचिव दीपक रुवाली ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और गैर-विधिक व्यक्तियों से कार्य कराने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारी समय पर कोर्ट में नहीं बैठ रहे हैं, जिससे न्याय व्यवस्था चरमरा गई है।
  • अल्टीमेटम: सचिव दीपक रुवाली ने चेतावनी दी कि यदि कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो 23 फरवरी से हल्द्वानी और रामनगर बार के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
  • प्रशासन का रुख: हंगामे की सूचना पर पहुंचे एडीएम विवेक राय ने वकीलों को लिखित आश्वासन देकर शांत कराया और जल्द सुधार का भरोसा दिया।

रामनगर: तहसील में 9 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन

रामनगर में भी स्थिति अलग नहीं थी। यहाँ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित मोहन तिवारी के नेतृत्व में वकीलों ने तहसील परिसर में जमकर नारेबाजी की।

  • आम जनता की परेशानी: वकीलों ने एसडीएम के माध्यम से कुमाऊं आयुक्त को 9 सूत्रीय ज्ञापन भेजा। उन्होंने कहा कि जमीनों के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में अनावश्यक देरी और समान मामलों में अलग-अलग फैसलों से जनता त्रस्त है।
  • उदासीनता का आरोप: अधिवक्ताओं का कहना है कि वे पहले भी जिलाधिकारी से मिल चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण लोग अब गैर-कानूनी तत्वों की शरण लेने को मजबूर हो रहे हैं।

मुख्य मांगें और भविष्य की रणनीति

मुद्देअधिवक्ताओं की मांग
व्यवहारअधिकारियों द्वारा अधिवक्ताओं के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित हो।
पारदर्शितागायब फाइलों की जांच हो और भ्रष्टाचार पर लगाम लगे।
राजस्व न्यायालयदाखिल-खारिज के मामलों का समयबद्ध निस्तारण हो और ‘तारीख पर तारीख’ बंद हो।
अनुशासनन्यायिक अधिकारी समय पर न्यायालयों में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें।

निष्कर्ष: वकीलों के इस संयुक्त विरोध ने प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें 23 फरवरी पर टिकी हैं—क्या प्रशासन वकीलों को संतुष्ट कर पाएगा या उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था एक बड़े गतिरोध की ओर बढ़ेगी?

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