सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में बिजली के भारी-भरकम बिलों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। घरेलू उपभोक्ताओं को थमाए जा रहे लाखों रुपये के बिलों के खिलाफ अब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने ऊर्जा निगम के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करते हुए विभाग पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया।
जिलाध्यक्ष कमलेश गडिया के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता ऊर्जा निगम कार्यालय के मुख्य गेट पर एकत्र हुए। कार्यकर्ताओं ने विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऊर्जा निगम मानकों को ताक पर रखकर मनमाने बिल भेज रहा है। जो मध्यमवर्गीय परिवार कुछ सौ रुपयों का बिल चुकाते थे, उन्हें अचानक लाखों के बिल थमा दिए गए हैं।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए:
- अवैध वसूली का आरोप: कार्यकर्ताओं ने कहा कि विभाग जबरन वसूली बंद करे और केवल उतनी ही राशि का बिल भेजे जितनी बिजली उपभोग की गई है।
- मानसिक उत्पीड़न: लाखों के बिल देखकर आम जनता सदमे में है, जिससे उन्हें भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
- धमकाने का सिलसिला: आरोप है कि भारी-भरकम बिल जमा न करने पर उपभोक्ताओं को कनेक्शन काटने की धमकी दी जा रही है।
“ऊर्जा निगम की यह मनमानी अब बर्दाश्त से बाहर है। यदि विभाग ने अपनी गलती नहीं सुधारी और बिलों में संशोधन नहीं किया, तो एनएसयूआई सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।” — कमलेश गडिया, जिलाध्यक्ष, NSUI बागेश्वर
मौके पर मौजूद रहे ये कार्यकर्ता
इस विरोध प्रदर्शन में छात्रशक्ति और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष सागर जोशी, राहुल बाराकोटी, पंकज कुमार, नीरज जोशी, हरीश गढ़िया, कमलेश कपकोटी, सचिन पांडे और राहुल खेतवाल सहित कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बागेश्वर में बिजली बिलों का यह मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि मीटरों की जांच की जाए और त्रुटिपूर्ण बिलों को तत्काल वापस लिया जाए। एनएसयूआई ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि समय रहते विभाग नहीं चेता, तो आगामी दिनों में विभाग का घेराव और भी आक्रामक तरीके से किया जाएगा।

