HomeMovieसितारगंज: यूटयूब पर धूम मचा रही व्यवसायी रितेश की कविताएं

सितारगंज: यूटयूब पर धूम मचा रही व्यवसायी रितेश की कविताएं

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नारायण सिंह रावत

सितारगंज। राईस मिलर्स व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मुंशीराम जिंदल के पुत्र रितेश जिंदल 10 से अधिक वर्षों से व्यवसायी के रूप में काम कर रहे है। व्यवसाय के साथ ही वह कवि भी है। वह कई कविताएं लिख चुके हैं। उनकी रचनाएं यूटयूब चैनल पर धूम मचा रही हैं रितेश की रचनाएं the storymist नामक चैनल पर उपलब्ध हैं। रितेश का जन्म छोटे से शहर सितारगंज में हुआ। इन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सितारगंज में रहते हुए की । इन्होंने स्नातक रुद्रपुर स्थित यूनिटी लॉ कॉलेज से बीए एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसके बाद व्यवसाय से जुड़ गए। यह पिछले 15 वर्षों से कविताएँ लिख रहे हैं।

इनसेट :
रितेश की एक कविता खिसक रही है जिंदगी
अँधेरी गुफाओं से
खर्च कर रहा हूँ मैं
आहिस्ता आहिस्ता
जीवन के हसींन पल
एक पोटली में बांधे
सरक रहे है
आहिस्ता आहिस्ता
आंसुओ के बोझ लिए
बैठा हूँ एक किनारे
सिसक रहे है
आहिस्ता आहिस्ता
खिसक रही है जिंदगी
अँधेरी गुफाओं से
खर्च कर रहा हूँ मैं
आहिस्ता आहिस्ता
दो दिल के खिंच तान में
टुकड़े हुए कई हजार
समेट रहा हूँ खुद को बुरा बनाके
नींव की तरह
आहिस्ता आहिस्ता
टुकड़ों को जोड़ते हुए
लकीरें मिलीं कई
दूसरों की बेरुखी लिए
आंसुओं से भर रहा हूँ
आहिस्ता आहिस्ता
खिसक रही है जिंदगी
अँधेरी गुफाओं से
खर्च कर रहा हूँ मैं
आहिस्ता आहिस्ता
शीशे की तरह रिस्ते टूटे
बटोर रहा हूँ
आखरी साँस के लिए
आहिस्ता आहिस्ता
टूटे रिश्तों के
जख्म है कई हजार
चुप रह कर
मरहम लगा रहा हूँ
आहिस्ता आहिस्ता
खिसक रही है जिंदगी
अँधेरी गुफाओं से
खर्च कर रहा हूँ मैं
आहिस्ता आहिस्ता
दिल की बातें दिल में रहने दी
बहार सिर्फ होंठ हिलाये
जुबान को दांतों तले दबाये
बातों को दफ़न कर रहा हूँ
आहिस्ता आहिस्ता
खिसक रही है जिंदगी
अँधेरी गुफाओं से
खर्च कर रहा हूँ मैं
आहिस्ता आहिस्ता ||

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