पहाड़ का गौरव: राजेंद्र राणा बने ‘स्पोर्ट्स कोचिंग’ के सरताज

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पहाड़ का गौरव: राजेंद्र राणा बने 'स्पोर्ट्स कोचिंग' के सरताज
पहाड़ का गौरव: राजेंद्र राणा बने 'स्पोर्ट्स कोचिंग' के सरताज

अल्मोड़ा के राजेंद्र सिंह राणा ने हरियाणा की प्रतिष्ठित खेल यूनिवर्सिटी में किया टॉप

उत्तराखंड का नाम किया रोशन

अल्मोड़ा के राजेंद्र सिंह राणा ने राज्य खेल विश्वविद्यालय हरियाणा से PGDSC-क्रिकेट परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया। प्रेरणादायक सफलता, दीक्षांत समारोह में सम्मान।

CNE REPORTER, ALMORA : देवभूमि की मिट्टी में पले-बढ़े एक साधारण से गाँव के युवा ने अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। अल्मोड़ा जिले के एक छोटे से गाँव चौमू के निवासी राजेंद्र सिंह राणा ने राज्य खेल विश्वविद्यालय हरियाणा (RCSPES University of Haryana, रायपुर) से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स कोचिंग (PGDSC) – क्रिकेट की परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल कर उत्तराखंड का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया है।


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यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह प्रतिष्ठित कोर्स देश के सबसे सम्मानित खेल विश्वविद्यालयों में से एक में आयोजित होता है। इतना ही नहीं, इस कोर्स में हिस्सा लेने के लिए देश भर के शीर्ष खिलाड़ी और अनुभवी कोच प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में, राजेंद्र राणा का पूरे हरियाणा राज्य में अव्वल आना अपने आप में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान है।

आगे बढ़ते हुए, 8 दिसंबर को आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह में उन्हें उनकी इस शानदार सफलता के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल राजेंद्र राणा की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह उत्तराखंड की खेल प्रतिभाओं के लिए एक नया द्वार खोलता है।

गाँव से लेकर देहरादून तक गूंज रहा एक ही नाम

राजेंद्र राणा की इस अद्भुत सफलता के बाद उनके पैतृक गाँव चौमू में जश्न का माहौल है। वास्तव में, अल्मोड़ा से लेकर कुमाऊँ और देहरादून तक आज हर तरफ एक ही नाम गूंज रहा है – राजेंद्र राणा, उनकी यह जीत उन सभी को प्रेरित करती है जो मानते हैं कि सफलता सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

पहाड़ के हर बच्चे के लिए प्रेरणास्रोत

राजेंद्र राणा का यह प्रेरणादायक सफर उन हजारों पहाड़ी बच्चों के लिए एक ज्वलंत मिसाल है, जो आज भी सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। उनका संघर्ष और सफलता जोर-शोर से यह संदेश देती है कि, “अगर जुनून सच्चा हो, तो रास्ते अपने आप बनने लगते हैं।”

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