सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी/नैनीताल। हाल के वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच, उत्तरी गौला वन क्षेत्र ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस क्षेत्र के संवेदनशील स्थलों की अब ड्रोन से निगरानी की जा रही है ताकि जंगली जानवरों, विशेषकर गुलदार (तेंदुए) की गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से नज़र रखी जा सके।

वन क्षेत्राधिकारी, उत्तरी गौला, विजय भट्ट ने इस पहल के बारे में विस्तार से बताया। चूंकि ड्रोन से पूरे क्षेत्र की निगरानी करना काफी आसान हो जाता है, इसलिए इससे गुलदार की गतिविधियों की पहचान तुरंत हो सकेगी और आवश्यक कदम तत्काल अमल में लाए जाएंगे। नतीजतन, मानव जीवन और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। आज, वन क्षेत्र के प्यूड़ा अनुभाग में ड्रोन से विशेष रूप से निगरानी रखी गई।
वन अपराधों पर भी नियंत्रण
इसके अलावा, वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तकनीक का उपयोग वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए भी किया जाएगा। दरअसल, ड्रोन की सहायता से वन अपराधों में लिप्त व्यक्तियों की पहचान करना और उन्हें सजा दिलाना अधिक सुगम हो जाएगा। अतः, उन्होंने चेतावनी दी कि वन अपराधों में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस अवसर पर वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट के साथ ही अनुभाग अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा, बीरपाल, पंकज सिंह रैक्वाल, कुन्दन कुमार, दिवान सिंह एवं मनोज कैड़ा भी उपस्थित थे।

