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विश्वासघात की रात: जिसे लिफ्ट दी, उसने ली जान; पर्दा उठा तो …..

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रिटायर्ड एयरफोर्स जवान भगवान सिंह की लिफ्ट लेकर हत्या का सनसनीखेज खुलासा। संपत्ति के लालच में बेटा ही निकला पिता का हत्यारा। विश्वासघात की पूरी कहानी पढ़ें।

CNE REPORTER/हरिद्वार। जिंदगी भर देश की सेवा करने वाले एक रिटायर्ड एयरफोर्स जवान का अंत उस रात हुआ, जिसका गवाह खुद उसका अपना बेटा बना। बहादराबाद में हुई 62 वर्षीय भगवान सिंह की गोली मारकर हत्या की यह वारदात शुरुआत में एक डरावनी ‘लिफ्ट और लूटपाट’ की कहानी लगी, लेकिन जैसे ही सस्पेंस का पर्दा हटा, सामने आया सच दिल दहला देने वाला था—जिस बेटे पर पिता ने सबसे ज्यादा भरोसा किया था, वही कपूत (बुरा बेटा) उनका हत्यारा निकला।

जमालपुर के रहने वाले रिटायर्ड जवान भगवान सिंह शनिवार रात अपने 22 वर्षीय बेटे यशपाल के साथ कार से रोशनाबाद में एक शादी समारोह में जा रहे थे। बेटे के बयान के मुताबिक, जटवाड़ा पुल पर उन्होंने एक अकेले खड़े व्यक्ति को मानवीयता के नाते लिफ्ट दी। थोड़ी दूर चलने पर, पीछे बैठी उसी ‘लिफ्ट यात्री’ ने एयरफोर्स जवान की कनपटी पर गोली दाग दी और अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। बेटे ने पुलिस को बताया कि वह घबरा गया और तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर परिजनों को सूचना दी।

हरिद्वार पुलिस इस सनसनीखेज वारदात की जांच में जुटी थी। लेकिन बेटे यशपाल के बयानों में बार-बार आ रहे विरोधाभासों ने पुलिस का ध्यान खींचा।

विश्वासघात : ​​यशपाल का ही दोस्त था कातिल

जांच की दिशा बदलते ही, पुलिस ने बेटे यशपाल को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। आखिरकार, उस रात का काला सच बाहर आ गया: लिफ्ट लेने वाला व्यक्ति कोई अजनबी नहीं, बल्कि यशपाल का ही दोस्त था!

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस जघन्य हत्याकांड का मोटिव चौंकाने वाला था—संपत्ति का लालच। यशपाल को डर था कि अगर पिता जिंदा रहे, तो पैतृक संपत्ति में उसकी शादीशुदा बहनों को भी हिस्सा मिलेगा। वह जल्द से जल्द, अकेले ही सारी संपत्ति का मालिक बनना चाहता था। इसी स्वार्थ में, उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपने पिता को मारने की क्रूर साजिश रची और लिफ्ट देने की झूठी कहानी गढ़ी।

एक फौजी जिसने देश को खुद से ऊपर रखा, उसे क्या पता था कि उसके बुढ़ापे का सहारा और इकलौता बेटा ही संपत्ति के लिए उसकी जान लेने की घिनौनी योजना बना रहा है। ऐसे कपूत के होने से क्या फायदा, जो अपने स्वार्थ के लिए रिश्तों का खून कर दे?

फिलहाल, पुलिस ने हत्या में शामिल अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है और जल्द ही इस वीभत्स हत्याकांड का आधिकारिक खुलासा किया जाएगा।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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