‘वो मेरे लिए सब कुछ थे…’ – अनगिनत यादों का सहारा
CNE DESK/भारतीय सिनेमा के इतिहास में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी का प्रेम अध्याय एक महाकाव्य जैसा है—विशाल, जीवंत और अंतहीन। यह सिर्फ़ दो सितारों का मिलन नहीं था, बल्कि दो पूरक आत्माओं का संगम था जिसने फ़िल्मी परदे और निजी जीवन दोनों को प्रकाशित किया।

जब ‘ही-मैन’ के नाम से प्रसिद्ध, लाखों दिलों के अज़ीज़ धर्मेंद्र जी ने इस दुनिया को अंतिम विदाई दी, तो उनकी “ड्रीम गर्ल” के जीवन में आया खालीपन सिर्फ़ एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि प्रेम के एक स्वर्णिम युग का अवसान बन गया।
‘शोले’ से शुरू हुई अनूठी दास्तान
सत्तर के दशक में शुरू हुई यह प्रेम कहानी उस दौर की सबसे चर्चित, साहसी और सुंदर कहानियों में से एक है। 1970 के दशक में, जब हेमा मालिनी ने अपना करियर शुरू किया, तभी धर्मेंद्र उनके जीवन में नायक बनकर आए। उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी ज़बरदस्त थी कि ‘सीता और गीता’ से लेकर ‘शोले’ तक, हर फ़िल्म में आग लगा देती थी।
परदे के पीछे, धर्मेंद्र अपनी सहजता, शायराना अंदाज़ और पुरुषोचित आकर्षण से हेमा मालिनी के दिल में जगह बनाते चले गए। हेमा मालिनी ने कई इंटरव्यू में बताया है कि धर्मेंद्र जी की विनम्रता, बच्चों जैसा भोलापन और उनका ज़मीन से जुड़ा व्यक्तित्व उन्हें सबसे ज़्यादा प्रिय था। विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद, उनका प्रेम अटल रहा और 1980 में वे विवाह के बंधन में बंध गए। यह मिलन सिर्फ़ पति-पत्नी का नहीं था, यह एक अटूट मित्रता और गहरी समझ का रिश्ता था। वह उनके जीवन का लंगर थे।

‘वह मेरे लिए सब कुछ थे’: विरह की वेदना
धर्मेंद्र जी के निधन के बाद, हेमा मालिनी ने जो भावुक पोस्ट्स साझा कीं, वे किसी शोक संदेश से कहीं अधिक थीं—वे उनके हृदय की वेदना का मार्मिक चित्रण थीं।
एक तस्वीर साझा करते हुए, जहाँ दोनों का प्रेम स्पष्ट झलक रहा था, उन्होंने लिखा:
“धर्म जी। वो मेरे लिए बहुत कुछ थे, एक प्यार करने वाले पति, हमारी दो बेटियों ईशा और अहाना के स्नेही पिता, एक मित्र, दार्शनिक, मार्गदर्शक, कवि, जरूरत के हर समय मेरे ‘गो-टू’ इंसान। सच कहूं तो, वे मेरे लिए सब कुछ थे।“
इन शब्दों की गहराई पाठकों के दिलों को छू जाती है। यह सिर्फ़ एक फिल्मी जोड़ी का बिछोह नहीं, बल्कि एक महिला के जीवन से उसके सबसे बड़े आधार स्तंभ, उसके हर रिश्ते के केंद्र, के चले जाने का दुख है। ‘मेरे लिए सब कुछ थे’—यह स्वीकारोक्ति बताती है कि धर्मेंद्र उनके लिए जीवन की परिभाषा थे, उनकी पहचान का एक अभिन्न हिस्सा थे।

खालीपन जो जिंदगीभर साथ रहेगा
हेमा मालिनी ने आगे जो कहा, वह विरह की पराकाष्ठा है। उन्होंने सार्वजनिक हस्ती के रूप में धर्मेंद्र की अपार लोकप्रियता, उनकी प्रतिभा, और विनम्र स्वभाव की बात करते हुए कहा कि उनकी कीर्ति इंडस्ट्री में हमेशा अमर रहेगी। लेकिन, जब बात निजी क्षति की आई, तो उनका दर्द शब्दों से बाहर छलक पड़ा:
“मेरी निजी हानि शब्दों से परे है, और जो खालीपन पैदा हुआ है, वह मेरी पूरी जिंदगी के साथ रहेगा। सालों के साथ-सफर के बाद अब मैं सिर्फ अनगिनत यादों के सहारे उन खास पलों को फिर-फिर जिऊंगी।”
यह खालीपन एक ऐसी कसक है जो उम्र भर साथ रहेगी। यह बताता है कि इतने दशकों के साथ के बाद, उनका जीवन अब अधूरा है। उनका कमरा खाली है, उनकी मेज़ पर उनकी कमी है, और उनके दिल में एक अनबुझा शून्य है। जिस मजबूत कंधे पर वह इतने साल टिकी रहीं, वह अब नहीं है।
अब, हेमा मालिनी के पास जीवन गुजारने का एकमात्र सहारा उनकी ‘अनगिनत यादें’ हैं—वह ख़ज़ाना जो उन्होंने साथ मिलकर बनाया। हर तस्वीर, हर गीत, हर साझा किया गया पल अब एक अनमोल मोतियों की माला है जिसे वह बार-बार पिरोकर अपने ‘धर्म जी’ को अपने पास महसूस करेंगी।
धर्मेंद्र जी और हेमा मालिनी का प्रेम सिर्फ़ एक कहानी नहीं, एक एहसास है—एक ऐसा एहसास कि सच्चा प्रेम कभी मरता नहीं, वह बस यादों के रूप में अपने साथी के साथ जीवनभर रह जाता है।
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी का विवाह तथा धर्म परिवर्तन
यह सत्य है कि धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने शादी करने के लिए एक विशेष रास्ता अपनाया था, लेकिन यह धर्म परिवर्तन का मामला न होकर कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा था।
1. धर्मेंद्र का मूल धर्म और नाम
- मूल धर्म: धर्मेंद्र का जन्म एक पंजाबी जाट सिख परिवार में हुआ था। उनका मूल धर्म सिख धर्म है।
- मूल नाम: उनका पूरा नाम धरम सिंह देओल (Dharam Singh Deol) है।
2. कानूनी और धार्मिक पहलू
चूंकि धर्मेंद्र पहले से ही प्रकाश कौर से शादीशुदा थे और भारतीय कानून (तब के हिंदू मैरिज एक्ट के तहत) एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं देता था, इसलिए दोनों ने शादी करने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया।
- विवाह का तरीका: धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने 1980 में शादी करने के लिए अपना धर्म बदलकर इस्लामी रीति-रिवाज अपनाया।
- इस्लामी नाम: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धर्म परिवर्तन के बाद धर्मेंद्र ने अपना नाम दिलावर खान (Dilawar Khan) रखा, और हेमा मालिनी ने अपना नाम आयशा बी रामा धर्म सिंह (Aisha Bi R. D. Singh) रखा।
- उद्देश्य: यह कदम मुख्य रूप से हिंदू मैरिज एक्ट के तहत बहुविवाह के कानूनी प्रतिबंधों से बचने के लिए उठाया गया था, क्योंकि इस्लामी कानून में एक व्यक्ति को एक से अधिक पत्नियाँ रखने की अनुमति है।

