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28 दिन की तलाश के बाद काली नदी ने लौटाया प्रदीप दरियाल, पर ज़िंदगी नहीं

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मां की उम्मीदें टूटीं, रहस्यमय मौत से कांप उठा मुनस्यारी

28 दिन की उम्मीदें, एक नदी और अनगिनत सवाल…
काली नदी ने लौटाया प्रदीप दरियाल का शव, पर अब भी रहस्य बरकरार।”

सीएनई रिपोर्टर, पिथौरागढ़। 5 अक्टूबर की सुबह उम्मीदों से भरी थी। मुनस्यारी के 25 वर्षीय प्रदीप दरियाल अपनी स्कॉर्पियो में हल्द्वानी से धारचूला के लिए निकले थे। लेकिन किसे पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। 28 दिन तक परिजन उम्मीद की लौ जलाते रहे, हर आवाज़ पर उनका दिल धड़क उठता था… लेकिन अंत में काली नदी के किनारे मिली सिर्फ एक निष्प्राण देह।

उल्लेखनीय है कि 6 अक्टूबर को प्रदीप की स्कॉर्पियो पिथौरागढ़-धारचूला एनएच पर बलुवाकोट के पास दुर्घटनाग्रस्त हालत में मिली थी, मगर चालक गायब था।
28 दिनों की खोज, दुआओं और इंतजार के बाद काली नदी के तल्ला बगड़ क्षेत्र में प्रदीप का शव बरामद हुआ — वही नदी, जिसके किनारे उनकी कार टूटी पड़ी थी।

जब यह खबर मुनस्यारी पहुंची, तो गांव में सन्नाटा छा गया। मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे, पिता पत्थर की मूर्ति बन चुके हैं।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम

परिजनों ने प्रदीप की मौत के रहस्य को जानने के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम की मांग की।
रविवार को जब डॉक्टर तैयार थे, परिवार ने कहा —

“हम अपने बेटे का पोस्टमार्टम बिना एक्सपर्ट के नहीं होने देंगे।”

इसके बाद अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. एन.एल. गर्विस को बुलाया गया। सोमवार को तीन डॉक्टरों के पैनल की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया गया।
डीएनए और बिसरा सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि मौत की सच्चाई उजागर हो सके।

28 दिन का इंतजार, अब जवाब की उम्मीद

पुलिस का कहना है कि फिलहाल परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है।
सीओ पिथौरागढ़ गोविंद बल्लभ जोशी ने कहा,

“पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जांच हर एंगल से की जा रही है।”

परिजन अब एक ही सवाल लेकर खामोश हैं —
क्या प्रदीप की मौत सिर्फ एक हादसा थी, या इसके पीछे कोई रहस्य छिपा है?

प्रदीप दरियाल — जो हर सफर में मुस्कान लेकर चलता था

गांव के लोग बताते हैं, प्रदीप हमेशा मुस्कुराता रहता था। हल्द्वानी से धारचूला तक यात्रियों को पहुंचाने वाला वही प्रदीप, अब खुद सफर में कहीं खो गया।
उनके दोस्त कहते हैं — “वो हमेशा सबकी मदद करता था। हमें भरोसा था कि वो लौट आएगा… लेकिन किसे पता था, काली नदी उसकी आखिरी मंज़िल बनेगी।”

अब मुनस्यारी की ठंडी हवाओं में बस एक ही सवाल गूंज रहा है —
प्रदीप आखिर गया तो कैसे?”
इस सवाल का जवाब अब फॉरेंसिक रिपोर्ट ही देगी।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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