सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। उत्तराखण्ड लोक वाहिनी की बैठक एडवोकेट जगत रौतेला की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में UKSSC पेपर लीक प्रकरण, लद्दाख के हालात और प्रसिद्ध पर्यावरणविद व वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की गिरफ़्तारी पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार को दमनकारी नीतियों की जगह लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों की समस्याओं के मूल कारणों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीनी घुसपैठ, जलवायु परिवर्तन, अवैज्ञानिक दोहन और पर्यावरणीय संकट गंभीर चुनौती हैं। ऐसे में सरकार को ठोस, वैज्ञानिक और पारदर्शी नीतियाँ बनानी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार नकल-विरोधी कानून का ढोल पीट रही है, लेकिन केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। इसे सख्ती से लागू करना आवश्यक है, वरना यह बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय होगा। बैठक में यह भी कहा गया कि उत्तराखण्ड लोक सेवा चयन आयोग सहित सभी तंत्रों में फैले भ्रष्टाचार पर कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है। तभी युवाओं का विश्वास सरकार व तंत्र में बहाल हो सकेगा।
संवाद ही समाधान
लोक वाहिनी के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों से बिना शर्त वार्ता करनी चाहिए। दमन से समस्याएँ हल नहीं होंगी, बल्कि और बढ़ेंगी। उन्होंने सुझाव दिया कि लद्दाख की जनता से संवाद कायम कर सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि लद्दाख को राज्य बनाने से देश को क्या लाभ या हानि होगी।
बैठक में मांग की गई कि हिमालयी क्षेत्रों के विकास व संसाधनों के उपयोग में स्थानीय लोगों, वैज्ञानिकों और पारिस्थितिक विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
दीर्घकालिक नीतियों की आवश्यकता
वक्ताओं ने कहा कि सरकार को तात्कालिक उपायों के बजाय दीर्घकालिक और ठोस नीतियाँ बनानी चाहिए। यदि आंदोलनकारियों का दमन होगा तो असंतोष और बढ़ेगा। समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान ही आगे का रास्ता है।
बैठक में एडवोकेट जगत रौतेला के साथ अजयमित्र सिंह बिष्ट, जंगबहादुर थापा, विशन दत्त जोशी, दयाकृष्ण काण्डपाल, अजय मेहता और रेवती विष्ट सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
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