सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। शहर और जंगल के बीच घटता फासला एक बार फिर चिंता का सबब बना। शनिवार देर रात हल्द्वानी-लालकुआं राष्ट्रीय राजमार्ग-109 पर अचानक हाथियों का झुंड आ पहुंचा। हाथियों को सामने देख कर राहगीरों और वाहन चालकों में दहशत फैल गई। कुछ देर के लिए राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सिमटते वन क्षेत्र और मानवीय हस्तक्षेप के कारण वन्यजीव अब आबादी वाले इलाकों में आने को मजबूर हो रहे हैं, जिसका नतीजा मानव-वन्यजीव संघर्ष के रूप में सामने आ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात करीब ग्यारह बजे हल्दूचौड़ पुलिस चौकी के ठीक सामने हाथियों का झुंड निकल आया। हाथियों के राजमार्ग पर आते ही वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई वाहन चालक अपनी गाड़ियाँ सड़क किनारे खड़ी कर मौके से हटने लगे। वहीं, राहगीरों की सांसें मानो थम-सी गईं।
पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर
सूचना पाते ही हल्दूचौड़ पुलिस चौकी से जवान मौके पर पहुंचे और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। पुलिस ने चेतावनी दी कि कोई भी व्यक्ति हाथियों के पास जाने या उन्हें उकसाने की कोशिश न करे। वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी। हालांकि, हाईवे पर बने पैराफिट के कारण हाथियों को सड़क पार करने में दिक्कत हुई और वे लंबे समय तक इधर-उधर भटकते रहे।
फसलों के कारण जंगल छोड़ रहे हाथी : वन क्षेत्राधिकारी
वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम ने बताया कि इन दिनों आसपास के गांवों में धान और गन्ने की फसल खड़ी है। यही कारण है कि हाथी जंगल से निकलकर आबादी और सड़कों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा दे सकती है, इसलिए ग्रामीणों को सतर्क रहने और भीड़ न लगाने की सख्त हिदायत दी गई है।
इधर स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जंगल से सटे इलाकों में हाथियों की आवाजाही अब आम हो चुकी है। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग पर उनका पहुंचना बड़ा हादसा साबित हो सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही रोकने और स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग उठाई है।
घटते जंगल, बढ़ता संघर्ष
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज़ी से घटते वन क्षेत्र और अनियंत्रित विकास कार्यों ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है। यही वजह है कि हाथियों समेत अन्य वन्यजीव अब लगातार मानव बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। हाईवे पर हाथियों का झुंड अकसर दिख जाता है। यदि समय रहते ठोस कदम न उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएँ और गंभीर रूप ले सकती हैं।
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यह भी उल्लेखनीय है कि शनिवार रात की यह घटना एक बार फिर सबको यह सोचने पर मजबूर करती है कि विकास की दौड़ में प्रकृति और वन्यजीवों की अनदेखी कितना बड़ा खतरा बन सकती है। हाथियों का झुंड भले ही सुरक्षित लौट गया हो, लेकिन इस घटना ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की वास्तविकता को और गहरा कर दिया है।

