विशेष सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पांडेय का फैसला
झूठे अरोप में 1 साल, 11 माह 2 दिन तक रहना पड़ा जेल
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) अल्मोड़ा की अदालत ने थाना क्षेत्र रानीखेत अंतर्गत साल 2023 के एक चर्चित मामले में पोक्सो एक्ट के अभियुक्त को दोषमुक्त सिद्ध करते हुए कारागार से रिहा करने का आदेश जारी किया है। अपनी सौतेली बेटी द्वारा कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों में पिता को 1 साल, 11 माह 2 दिन तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहना पड़ा।
पीड़िता ने 25 अगस्त 2023 को रानीखेत कोतवाली में एक तहरीर दी थी। जिसमें उसने अपने सौतेले पिता पर उसके साथ दो बार शारीरिक संबंध बनाने, मारपीट करने व धमकी देने के आरोप लगाए थे। जबकि आरोपी बनाए गए सौतेले पिता का कथन था कि उसकी बेटे अंजान लड़कों से फोन पर घंटों बातें करती थी तथा बाहरी लड़कों के साथ होटलों में रहती थी। जिस कारण वह उसे डांटता था, जिसका बदला लेने लिए उसकी बेटी ने उस पर पूरी तरह झूठे आरोप लगा दिए हैं। हालांकि 7 अगस्त, 2023 को आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर पोक्सो व अन्य धाराओं में जेल भेज दिया था।
मामला यह था कि अभियुक्त गनियाद्योली रानीखेत में किराए के मकान में रहता था और कारपेंटर का काम करता था। उसकी 2 शादियां थी। जिसकी दूसरी पत्नी के साथ एक लड़की थी, जो 17 वर्ष 6 महीने की थी। उसने आरोप लगया था कि सौतेले पिता द्वारा उसका यौन उत्पीड़न किया है और मारपीट व जान से मारने की धमकी दी थी।
विशेष सत्र न्यायाधीश द्वारा अभियुक्त को धारा 323, 506, 376(2)(द) भा.द.सं. एवं धारा 5 (स) सपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत आरोप लगाए गए अभियोजन द्वारा कुल 10 गवाह परीक्षित कराये गए जिसमें से पीड़िता के सौतेले भाई, सौतेली माँ के अलावा पीड़िता की सगी माँ तथा पुलिस कांस्टेबल रानीखेत कविता, श्रीमती अफ़सा मेरठ इंचौली प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक, डा० पूजा महिला अस्पताल, कश्मीर सिंह प्रभारी थानाध्यक्ष, हेमा कार्की अन्वेषण अधिकारी कोतवाली रानीखेत तथा द्वितीय अन्वेषण अधिकारी रिंकी सिंह को भी परीक्षित किया गया।
विशेष सत्र न्यायाधीश द्वारा अभियुक्त के धारा 313 के बयान द० प्र० सं० के बयान कराये तत्पश्चात बचाव पक्ष व अभियोजन पक्ष की बहस सुनी। अभियोजन पक्ष द्वारा अपने केस को सिद्ध करने की काफी कोशिश कि बचाव पक्ष की दलीलों के सामने अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी भारी विरोधाभाषी बयान तथा पीड़िता की उम्र में तथ्यों व प्रमाण पत्रों व तथ्यों को झूठा साबित करते हुए तथा पीड़िता की माँ तथा परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा पीड़िता के बयानों कहीं भी समर्थन नहीं दिया। सर्वोच्च न्यायालय के नजीरों के सामने अभियोजन पक्ष की कोई भी दलील केस को सिद्ध करने के लिए नहीं दे पाया।
अंततः अभियुक्त को निर्दोष मानते हुए विशेष सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पाण्डे द्वारा उसे रिहा करने के आदेश दे दिए। इस मामले में अभियुक्त की तरफ से एडवोकेट जमन सिंह बिष्ट एवं एडवोकेट अजय सिंह मेहता ने पैरवी की।
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