HomeUttarakhandAlmoraकभी लोग हंसते थे, आज नतमस्तक ! युवा गौ—पालकों की प्रेरणादायी कहानी

कभी लोग हंसते थे, आज नतमस्तक ! युवा गौ—पालकों की प्रेरणादायी कहानी

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📌 महानगरों में नौकरी की बजाए गांव में शुरू किया गौ—पालन

👉 एक दिन में करीब 100 लीटर दूध का उत्पादन

👍 शुद्ध देशी घीं के लिए एडवांस बुकिंग

🙏 क्रास ब्रीडिंग से विदेशी नस्ल की गायें विकिसित

— दीपक मनराल —

CNE ALMORA/Success Story : प्रतिदिन करीब 100 लीटर दूध का उत्पादन, देशी घीं के लिए एडवांस बुकिंग, गाय के गोबर से धूप निर्माण के प्रोजेक्ट पर कार्य। गौ—पालन से जुड़ा यह कारोबार किसी महानगर नहीं, बल्कि अल्मोड़ा जनपद के हवालबाग विकासखंड अंतर्गत रैलाकोट गांव में दो उच्च शिक्षित युवा कर रहे हैं। खास बात यह है कि इनका व्यापार सिर्फ एक साल में इस मुकाम पर पहुंचा है। जहां यह स्वयं अपनी आय तो जेनरेट कर ही रहे हैं, अन्य लोगों को रोजगार भी प्रदान किए हैं। युवा गौ—पालकों की प्रेरणादायी कहानी निश्चित रूप से अद्भुत है।

यकीन मानिये, जब भी आप कुछ लीक से हटकर नया काम शुरू करोगे तो आपके रिश्तेदारों से लेकर तमाम यार—दोस्त व समाज आप पर हंसेगा। आपको बात—बेबात पर हतोत्साहित करने के प्रयास होंगे, लेकिन यदि आपके इरादे बुलंद है तो यही आप पर हंसने वाले लोग एक दिन आपके आगे नतमस्तक हो जायेंगे। ऐसा ही कुछ अल्मोड़ा के इन दो युवाओं के साथ हुआ था, जो आज तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं।

गौ—पालन से जुड़े युवाओं की सफलता की कहानी

उल्लेखीनय है कि उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में जहां बेरोजगारी की बात कह कर युवा पीढ़ी लगातार महानगरों की ओर पलायन कर रही है। वहीं इन युवाओं ने व्यावसायिक गौ पालन शुरू कर बड़ी मिसाल पेश की है। खास बात यह है कि महानगरों में मल्टीनेशनल कंपनियों की नौकरी भी इन्होंने अपने इस जनून के लिए ठुकरा दी है। वर्तमान में इनकी गौशाला में डेढ़ दर्जन से अधिक गाये हैं। प्रतिदिन यह लगभग 100 लीटर दूध का उत्पादन व बिक्री कर रहे हैं। यही नहीं, इनके द्वारा तैयार शुद्ध देशी घीं की एडवांस बुकिंग चलती है। वहीं, गाय के गोबर से धूप निर्माण की दिशा में भी इन्होंने प्रयास शुरू कर दिए हैं।

जानिए नवजोत और वेदांत के बारे में

दरअसल, यह सफलता की प्रेरणादायक कहानी अल्मोड़ा के दो युवाओं नवजोत जोशी और वेदांत गोस्वामी की है। आइये सबसे पहले इनके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं —

वेदांत गोस्वामी की प्रारम्भि शिक्षा—दिक्षा रानीखेत में हुई थी। फिर यह अल्मोड़ा आग गए। इन्होंने एम कॉम किया है तथा दिल्ली से लगे गुरुग्राम में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कई सालों तक कार्य किया है।

पहाड़ी ग्वालों ने कर दिया कमाल

गौ—पालन को बनाया रोजगार का जरिया

नवजोत व वेदांत एक अच्छे मित्र भी हैं। हालांकि नवजोत वेदांत से सीनियर रहे हैं। वेदांत ​जब मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब कर रहे थे तब इनको काफी अच्छी सेलरी मिलती थी। हर सुख—सुविधा इनके पास थी, लेकिन मन घर—गांव से जुड़ा था। पहाड़ में रहकर कारोबार करने की इच्छा इनके मन में पहले से थी। इस बीच नवजोत ने इन्हें सुझाव दिया कि क्यों न गांव में गाय पालें और इसी को अपने रोजगार बना लें।

फिर क्या था, वेदांत सीधे अल्मोड़ा के रैलाकोट ग्राम पहुंच गए। जहां नवजोत ने गांव के पुराने भवन की रिप्येरिंग कराई। फिर करीब पांच नाली भूमि को गौ—पालन के लिए चुन लिया।

एक—दो गाय से हुई शुरुआत, अब 10 गाय 08 बछिया

नवजोत जोशी बताते हैं कि इन्होंने पहले एक गाय से शुरुआत की। फिर वह एक बीमार गाय भी कहीं से अपने घर रैलाकोट ले आये। जिस बीमार गाय को लाये वह मरणासन्न स्थिति में भी। तमाम लोगों ने इनका मजाक उड़ाया। कहा कि गाय को गढ्ढे में दबाने को लाये हो। यह भी कहा कि गौ—पालन में कुछ नहीं रखा। इसके बावजूद नवजोत ने हिम्मत नहीं हारी। गाय की सेवा पूरी ईमानदारी से की। यह अस्वस्थ गाय भी फिर पूरी तरह स्वस्थ हो गई। गौ—वंश में वृद्धि हुई। वर्तमान में इनके पास 10 दुधारू गायें और 08 बछिया हैं।

तैयार हैं देशी—विदेशी, उन्नत नस्लों की गाय

नवजोत जोशी और वेदांत गोस्वामी ने बताया कि वर्तमान में इनके पास जर्सी, गिर, साहीवाल और एचएफ (होल्स्टीन फ़्रीज़ियन) आदि उम्दा नस्लों की गाये हैं। यही नहीं, यह एचएफ और गिर से क्रास ब्रीड कर गिरोलैंडो ब्रीड भी तैयार कर रहे हैं। बता दें कि गिरोलैंडो एक विदेशी नस्ल की गाय है जो करीब 25 से 30 लीटर दूध आराम से प्रतिदिन देती है। इस नस्ल की कई गायों को 45 लीटर तक दूध देते देखा गया है।

गौशाला में मौजूद गायें अैर दुग्ध उत्पादन

नवजोत जोशी ने बताया कि इनकी गौशाला में देशी—विदेशी नस्ल की गायें अलग—अलग दुग्ध उत्पादन कर रही हैं। हॉलिस्टन — 25 लीटर दूध प्रतिदिन देती है। वीं क्रास ब्रीड 22 लीटर, जर्सी 20 लीटर, गिर 14 लीटर तथा साहिवाल भी 14 लीटर दूध प्रतिदिन दे रही।

देशी घीं का भी प्रोडेक्शन शुरू

इसके अलावा माह में 10 से 12 किलो घीं भी तैयार हो रहा है। देशी घीं 900 रूपये प्रति किलो बिक रहा है। यदि गायों की संख्या बढ़ेगी तो उत्पादन भी बढ़ेगा। देशी घीं के लिए एडवांस बुकिंग की जाती है। दूध 52 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। विशेषता यह है कि इनकी तमाम गायों को शुद्ध पौष्टिक भोजन दिया जाता है और कहीं किसी किस्म की मिलावट नहीं होती।

युवा उद्मियों का भावी प्रोजेक्ट

नवजोत ने बताया कि उनकी अगली योजना गाय के गोबर से धूप निर्माण की है। इस दिशा में वह एक संस्था के संपर्क में हैं। जल्द ही काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि उनकी प्लानिंग यह है कि जल्द ही वह गायों की संख्या बढ़ा दो दर्जन से अधिक कर लें, ताकि व्यापार को और आगे बढ़ाया जा सके। जल्द ही उनके पास गायों की कई ऐसी नस्लें होंगी, जो शायद पूरे प्रदेश में कहीं न मिलती हो।

युवाओं के लिए नवजोत और वेदांत का संदेश

युवा उद्यमी नवजोत जोशी और वेदांत गोस्वामी ने कहा कि वह आज की युवा पीढ़ी से सिर्फ इतना कहना चाहते हैं कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। इंसान की सोच छोटी होती है। यदि आप हिम्मत करें तो अपने घर में ही पशु पालन से आय के स्रोत बढ़ा सकते हैं। गौ—पालन से जहां एक ओर गौ—सेवा का कार्य होता है, वहीं आपके लिए अपने ही घर में सह बड़ा रोजगार भी है। अतएव वह यही कहना चाहेंगे कि युवा रोजगार के लिए महानगरों में जाने अथवा सरकारी नौकरियों के पीछे भागने की बजाए घर—गांव में खाली पड़ी भूमि पर कारोबार शुरू करें। यदि मेहनत करेंगे तो सफलता आपके कदम चूमेगी।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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