HomeUttarakhandAlmoraअल्मोड़ाः योग साधकों के लिए अनुकूल उत्तराखंड की भूमि-मनोज तिवारी

अल्मोड़ाः योग साधकों के लिए अनुकूल उत्तराखंड की भूमि-मनोज तिवारी

योग अपनाकर व्यक्तित्व विकास करेंः कुलपति
योग विभाग में 03 दिनी अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस संपन्न

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ाः यहां सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग में आयोजित 03 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का गहन मंथन के साथ आज समापन हो गया। तीसरे रोज विभिन्न सत्रों में पतित पावनी गंगा और उसके पुनरुद्धार को लेकर मंथन समर्पित रहा। दर्जनों शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र पढ़े।

समापन कार्यक्रम के मुख्य विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि विश्वविख्यात रही है। जिसमें योग को लेकर अपार संभावनाएं हैं। यह भूमि योग साधकों के लिए अनुकूल है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जगत सिंह बिष्ट ने योग की निष्पत्ति और उसके क्षेत्र पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि योग सभी को जोड़ता है। प्राचीन समय से योग प्रचलन में है। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, ध्यान, धारणा, समाधि आदि ही योग है। उन्होंने कहा कि योग को अपनाकर अपने व्यक्तित्व का विकास किया जा सकता है। कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय का योग विज्ञान विभाग अपने विशेष कार्यक्रमों के जरिये साख बनाए हुए है। इससे पहले दीप प्रज्वलन कर अतिथियों को समापन समारोह का शुभारंभ किया। जिसकी शुरूआत योग विभाग की छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत से की। योग विज्ञान विभाग की ओर से समापन सत्र अतिथियों को प्रतीक चिन्ह देकर व शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया।

कॉन्फ्रेंस के संयोजक डॉ. नवीन भट्ट ने अतिथियों का स्वागत कर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस की विस्तार से रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के विभिन्न सत्रों के निष्कर्ष को प्रस्तुत किया। इस कांफ्रेंस में महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि 12 राज्यों समेत मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया, टर्की आदि राष्ट्रों से योग विज्ञान के 170 विद्वानों ने शोध पत्र पढ़े। समारोह में विशिष्ट अतिथि प्रो. रजनी नौटियाल, प्रो. विनोद नौटियाल, विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. इला बिष्ट, प्रो. आराधना शुक्ला, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. इला साह, कुलानुशासक डॉ. मुकेश सामंत आदि ने विचार रखे।

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