HomeUttarakhandDehradunउत्तराखंड में इगास पर्व पर रहेगा सार्वजनिक अवकाश, आदेश जारी

उत्तराखंड में इगास पर्व पर रहेगा सार्वजनिक अवकाश, आदेश जारी

देहरादून| उत्तराखंड में बूढ़ी दीवाली यानी इगास पर्व पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस संबंध में आज मंगलवार को शासन ने आदेश जारी कर दिया है। बात दें कि इस बार इगास बग्वाल चार नवंबर को है।

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सचिव प्रभारी विनोद कुमार सुमन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 4 नवंबर (शुक्रवार) को इगास बग्वाल पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इसके अलावा उक्त तिथि को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 संख्या 26 की धारा 25 द्वारा बैंक कोषागार तथा उप कोषागार व अन्य सरकारी प्रतिष्ठान भी इस दिन बंद रहेंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने की थी घोषणा

उत्तराखंड के लोकपर्व ईगास बग्वाल पर राजकीय अवकाश रहेगा। बीती 25 अक्‍टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह घोषणा की थी। यह दूसरा मौका होगा जब उत्तराखंड में लोकपर्व ईगास बग्‍वाल को लेकर राज्य में अवकाश घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने गढ़वाली में किया ट्वीट

बीते दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने गढ़वाली बोली में ट्वीट किया था। ट्वीट में उन्‍होंने लिखा था कि ‘आवा! हम सब्बि मिलके इगास मनोला नई पीढ़ी ते अपणी लोक संस्कृति से जुड़ोला। लोकपर्व ‘इगास’ हमारु लोक संस्कृति कु प्रतीक च। ये पर्व तें और खास बनोण का वास्ता ये दिन हमारा राज्य मा छुट्टी रालि, ताकि हम सब्बि ये त्योहार तै अपणा कुटुंब, गौं मा धूमधाम से मने सको। हमारि नई पीढी भी हमारा पारंपरिक त्यौहारों से जुणि रौ, यु हमारु उद्देश्य च।’

इस वर्ष भी अवकाश घोषित

बता दें कि उत्तराखंड में दीपावली के 11 दिन बाद लोक पर्व इगास मनाया जाता है। प्रदेश में इगास पर इस वर्ष भी अवकाश घोषित किया गया है। आज मंगलवार को शासन ने इगास पर अवकाश की घोषणा की अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी लोग इस त्योहार को धूमधाम से मनाएं और नई पीढ़ी को भी इस इस त्योहार से जोड़ें।

क्या है इगास पर्व

उत्तराखंड में बग्वाल (इगास) मनाने की परंपरा है। दीपावली पर्व को यहां बग्वाल कहा जाता है, जबकि बग्वाल (दीपावली) के 11 दिन बाद एक और दीपावली का त्‍योहार मनाया जाता है। इसे इगास कहते हैं। पहाड़ की लोक संस्कृति से जुड़े इगास पर्व के दिन घरों की साफ-सफाई के बाद मीठे पकवान बनाए जाते हैं और देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।

नृत्य के साथ खेला जाता है भैलो

इगास पर्व के दिन गाय और बैलों की पूजा की जाती है। शाम के वक्त गांव के किसी खाली खेत अथवा खलिहान में नृत्य के साथ भैलो खेला जाता है। भैलो एक प्रकार की मशाल होती है, जिसे नृत्य के दौरान घुमाया जाता है।

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