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कोरोना असर : अल्मोड़ा पालिका की आर्थिकी गड़बड़ाई, नये कार्यों में मुश्किलें, फिलहाल प्राथमिकता में केवल जरूरी कार्य

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चन्दन नेगी, अल्मोड़ा

आय के सीमित संसाधनों से नगर पालिका अल्मोड़ा पहले से ही आर्थिक संकट झेलते रही है। अब कोविड-19 के संक्रमण और लाकडाउन ने पालिका की आर्थिकी को बुरी तरह गड़बड़ाया है। चाहते हुए जनहित में पालिका कोई नया बड़ा कार्य कर पाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। कुछ समय पहले से लाकडाउन में बाजार खोलने समेत कुछ अन्य छूटें मिलने से उम्मीद की किरण जरूर जगी है, लेकिन फिलहाल आर्थिक संकट में बड़ी राहत नहीं है।
पालिका के आर्थिक संकट की मुख्य वजह क्षेत्रफल व आबादी का कम होना है। इसी कारण राज्य वित से पर्याप्त धन या जरूरत के मुताबिक धन उपलब्ध नहीं हो पाता। पालिका को अधिकांश धन अपने ही संसाधनों जुटाना पड़ता है। दरअसल, राज्य वित्त आयोग क्षेत्रफल व जनसंख्या के आधार पर धनावंटन की संस्तुति करता है। अल्मोड़ा में अन्य जिलों की तुलना में यह क्षे़त्रफल व जनसंख्या काफी कम है और जरूरतें बढ़ते जा रही हैं। अल्मोड़ा पालिका का दायरा मात्र लगभग साढ़े वर्ग किमी है जबकि जनसंख्या 40 हजार दर्ज है। इसी एवज में राज्य वित्त मिल पाता है। जो प्रतिमाह लगभग 92 लाख है। यह धन भी साल में चार किश्तों में शासन से मिलता है। इधर कोरोना के संकटकाल को देखते हुए प्रतिमाह दिया जा रहा है। दूसरी ओर स्थिति ये है कि पालिका को प्रतिमाह वेतन व पेंशन के लिए ही करीब एक करोड़ छह लाख रूपये की आवश्यकता पड़ती हैं। बांकी सारे कार्य पालिका अपने भवन कर, दुकान किराया और तहबाजारी जैसे आय के स्रोतों से ही करती है।
अब कोरोनाकाल व लाकडाउन ने पालिका की आर्थिक स्थिति और पतली कर दी। लाकडाउन के कारण करीब तीन माह से तहबाजारी ठप रही। न तो भवन कर जमा हो पाया और न ही किराया। लाकडाउन से व्यापार बंद होने से जीएसटी के अंश में असर पड़ गया। ऐसे में पालिका के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। अब बाजार व दफ्तर खुले हैं और कुछ छूटें मिली हैं। अब लोग धीरे-धीरे भवन कर जमा कर रहे हैं। मगर लाकडाउन ने सभी को आर्थिक रूप से कमजोर किया है। ऐसे में किराया और भवनकर भी एकमुश्त नहीं आ पा रहा है। ऐसी स्थिति में पालिका जनहित में कोई बड़ा निर्माण या अन्य कार्य करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। वह सिर्फ अति आवश्यक कार्यों पर ही ध्यान दे रही है।

काफी मुश्किल में चल रहा काम :-

पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी का कहना है कि उक्त स्थितियां आड़े आने से मुश्किलें पैदा हुई हैं। अब बाजार खुलने व लाकडाउन में रियायतें मिलने से उम्मीद जगी है कि स्थिति संतुलन में आ जाएगी। लेकिन अभी दिक्कतें बरकरार हैं। उन्होंने बताया कि जितना राज्य वित्त मिलता है, उससे ज्यादा वेतन व पेंशन में ही खर्च होता हैं। पालिका को बांकी सारे कार्य अपने ही संसाधनों से करने होते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल जहां आवश्यक कार्य हैं, उन्हें ही प्राथमिकता दी जा रही है और स्थिति में सुधार आते ही अन्य विकास कार्य भी शुरू होंगे। उन्होंने जनता से सहयोग भावना से धैर्य बनाए रखने की अपील भी की है।

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