HomeUttarakhandAlmoraअल्मोड़ा: निजीकरण की साजिशों का विरोध, कर्नाटक ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

अल्मोड़ा: निजीकरण की साजिशों का विरोध, कर्नाटक ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

अल्मोड़ा। एनआरएचएम उत्तराखंड के पूर्व उपाध्यक्ष बिट्टू कर्नाटक ने सरकारी महकमों का निजीकरण करने की साजिशों का विरोध किया है। कहा है कि इससे देश पूंजीपतियों के हाथों चला जाएगा और गरीब पिस जाएंगे। इस मुद्दे पर उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन प्रधानमंत्री को प्रेषित किया है और निजीकरण की परंपरा रोकने का अनुरोध करते हुए ऐसी साजिश रचने वाले मंत्रालयों व उनके अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा है कि सरकारी संस्थानों को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए और यह वर्तमान समय में अत्यन्त आवश्यक भी है। कोरोनाकाल में चिकित्सक, चिकित्सा स्टाफ, पुलिस विभाग, प्रशासनिक विभाग आदि सभी सरकारी सेवकों का योगदान रहा है। इसके विपरीत प्राइवेट संस्थान, कम्पनीज, फैक्ट्रियों ने अपने कई कर्मचारियोें को निकाल दिया हैै। यहां तक कि घरों में कार्य करने वाले लोग भी पूंजीपतियों ने निकाल दिए हैं। एक ओर प्राईवेट अस्पताल लगातार जरूरतमदों से लाखों रूपयों का बिल वसूल रहे थे, वहीं सरकारी अस्पताल व उसके कार्मिक इस मेडिकल आपात काल के दौरान अपनी व अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर उत्कृष्ठ कार्य कर रहे हैं। संकट के वक्त सरकारी भवनों, सरकारी स्कूल ही क्वारंटीन सेन्टर बने तथा इनमें कार्यरत कार्मिक व शिक्षक द्वारा 24 घंटे मानव सेवा लगे हैं।
उन्होंने कहा है कि ऐसी स्थिति में भारी योगदान के बावजूद सरकारी विभागों का निजीकरण किया जा रहा है, जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार द्वारा निजी हाथों में सौंपने की साजिश की जा रही है, जो राट्रहित में नहीं है। इससे लाखों कर्मचारियों का परिवार तो प्रभावित होगा ही, साथ ही सरकारी विभाग निजीकरण के भय से अपना कार्य करने में असहजता महसूस करेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में 562 रियासतों का विलय कर देश का निर्माण हुआ, किन्तु आज निजीकरण की आड़ में देश की सम्पत्ति को चंद पूंजीपति घरानों को सौंपने की परम्परा उचित नहीं है। इससेे देश का लोकतंत्र कमजोर होगा और देश पूंजीपतियों के अधीन हो जायेगा। ऐसे में ये पूंजीपति निजीकरण के पश्चात अंग्रेजों के नक्शे कदम पर चलकर गरीबों से उगाही करेंगे ।
श्री कर्नाटक ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि सरकार सरकारी घाटे के बहाने सरकारी संस्थानों का निजीकरण नहीं करे। यदि कोई विभाग या संस्था में घाटे में है। तो सरकार उसका प्रबन्धन को ठीक कर उसे समायोजित करे। उन्होंने मांग की है कि सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में बेचने की साजिश करने वाले मंत्रालय व उनके अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाए और देश के जनमानस के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया जाय। उन्होंने तत्संबंधी निर्देश निर्गत करने का अनुरोध प्रधानमंत्री से किया है।

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