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उत्तराखंड के बेटे ने कोरोना को हराकर दो और मरीजों को दिया जीवन दान, पढ़िए लक्की की पूरी दास्तान, प्रेरणा देगी आपको भी

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हल्द्वानी। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के पीडितों को समाज में आजकल जहां अलग ही दृष्टि से देखा जा रहा है वहीं दूसरी ओर मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जनपद निवासी और वर्तमान में करावल नगर विधानसभा क्षेत्र दयालपुर,दिल्ली निवासी लाल सिंह रावत (लक्की) ने लोक नायक हास्पिटल के चाहने वालों की संख्या में अच्छा खासा इजाफा हुआ। मरीजों की इसी सेवा का नतीजा रहा कि उनके परिवार के अन्य आठ लोग बिना चिकित्सालय गए ही घर पर रहते हुए कोरोना से जंग जीते और अब लक्की समेत सभी परिवार के सदस्य पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

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लक्की ने कोरोना से हरा कर अपनी जान तो बचाई ही अपना प्लाज्मा देकर दो अन्य लोगों की जिंदगी बचाने का पुण्य कार्य भी किया। उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के उत्तरेखाल निवासी लाल सिंह रावत दिल्ली के करावल नगर विधानसभा क्षेत्र दयालपुर में अपने परिवार के साथ रहते हैं| वह एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता हैं और कोरोना काल में जनता की सेवा और खान पान और राशन बाटते वक्त कोरोना संक्रमित हो गए। उनको लगा की मुझे कोरोना टेस्ट करना चाहिए। उनके परिवार के 8 सदस्य इस वायरस की चपेट में आ गए थे जिसमें उनके पांच और तीन साल के दो बच्चे भी शामिल थे|

लाल सिंह रावत पर जैसे ही इस महामारी की पुष्टि हुई वह दिल्ली के लोक नायक हॉस्पिटल में एडमिट हो गए और हॉस्पिटल से फ़ोन करके अपने परिवार का हौसला बढ़ाने के साथ साथ मार्गदर्शन भी करते रहे “घबराना नहीं लड़ना है डरना नहीं कोरोना को हराना है। तभी तो हारेगा कोरोना और हम सब जीतेंगे” यहाँ तक कि लाल सिंह रावत ने अपने परिवार के लोगों से कहा कि हॉस्पिटल आने की जरुरत नहीं सभी घर में क्वारंटाइन रहें, हमको कुछ नहीं होगा, जब उन्होंने देखा कि हॉस्पिटल में कोरोना महामारी से संक्रमित मरीजों की देखभाल ठीक तरह से नहीं हो पा रही है न चिकित्सक और न सहायक कर्मचारी कोई भी पास आने को राजी नहीं थे

बाहर से किसी को भी अंदर या बाहर जाना सख्त मना था। बहुत से मरीज ऐसे भी थे जो ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे न ही चल पा रहे थे, उनका खाना, पानी, दवाई इत्यादि से किसी को कोई मतलब नहीं था, लाल सिंह रावत ने हॉस्पिटल की ये दुर्दशा देखीं तो वे स्वयं को रोक नहीं पाये और उसी दिन मन बना लिया कि जब तक मैं यहां हूँ इन सबकी देख रेख दिन रात करूंगा और किसी से भेद भाव नहीं करूंगा बल्कि सबकी सेवा और देखभाल करुंगा।

कहते हैं जब मन मे किसी कार्य को करने का दृढ संकल्प हो तो कुछ भी करना नामुमकिन नहीं है। लाल सिंह रावत ने वह करके दिखाया जिसकी हॉस्पिटल में कल्पना करना भी मुमकिन नहीं था। इस दौरान उन्होंने हॉस्पिटल की कुछ फोटो और वीडियो भी अपने कमरे में कैद की। ऐसी स्थिति में जहाँ लोग अपने जीवन की आस खो रहे थे वहीं लाल सिंह रावत ने ग़जब का हौसला दिखाया एवं विपरीत परिस्थितियों के बावजूद संक्रमित हुए व्यक्तियों की मदद में लग गए| जहाँ आवश्यक पी पी ई किट पहन कर भी Covid-19 के वारियर्स के मन में भय बना हुआ था वहीं लाल सिंह रावत बिना आवश्यक उपकरणों के अपनी सेवाओं से सबका दिल जीत रहे थे व मरीजों की सेवा कर रहे थे|

लाल सिंह रावत अपनी सेवा के दौरान कोरोना से संक्रमित मरीजों का मनोबल और हौसला भी बढ़ाते थे| उन्होंने अपने सेवा कार्यों से अस्पताल के सभी मरीजों और चिकित्सा कर्मियों का दिल जीत लिया। उनके इस कार्य की चिकित्सा कर्मियों ने भी बहुत सराहना की और उनके जज्बे को सलाम किया| लाल सिंह रावत ने अपने साहस, सेवा, समर्पण व कभी ना हार मानने वाले जज्बे का जिस तरह से कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी वह हम सब के लिए अनुकरणीय है।

लाल सिंह रावत ने टेलीफोन पर सीएनई को बताया कि जब वह कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे तब किसी भी राजनीतिक दल या प्रशासनिक अमले ने उनके और उनके परिवार की न ही कोई मदद की और न ही सुध ली| कुछ मित्रों और पड़ोसियों ने हमसे लगातार संपर्क बनाए रखा और आश्वासन दिया कि आपको कुछ भी मदद चाहिये तो हमें अवश्य बताना, इन्हीं लोगों की सहानुभूति से उन्होंने खुद को संभाला और अपने सेवा कार्यों में व्यस्त रहे| कहते हैं कि किसी के सुख में भले ही शामिल ना हो सको परंतु दुःख के समय शामिल होना ही असली मानवता है। हर आदमी एक सा नहीं होता है कुछ अच्छे तो कुछ बहुत अच्छे भी होते हैं।

लाल सिंह रावत अपना प्लाज्मा दान कर दूसरों को बचाने आगे आये और ये वक्त देशभक्ति दिखाने का बढि़या अवसर है। लाल सिंह रावत बताया की उन्होंने स्वयं व्हाट्सप्प ग्रुप्स और फेसबुक पर अपना सन्देश भेजा अगर किसी जरुरत मंद व्यक्ति को प्लाज्मा डोनेशन की आवश्यकता है तो मुझसे संपर्क करे। कोरोना मरीजों के लिए इस समय प्लाज्मा डोनेशन एक महादान है और एक सच्ची देश भक्ति है। लाल सिंह रावत ने बताया की उनके पास काफी फ़ोन कॉल आये फिर उन्होंने मैक्स हॉस्पिटल साकेत में अपना प्लाज्मा डोनेट किया। वे कहते हैं कि इस महामारी को लेकर अभी भी नकारात्मक दृष्ठिकोण है।

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