Homeआलेखव्यंग्य लघु कथा : जंगल राज में किसी ने कुछ नहीं देखा

व्यंग्य लघु कथा : जंगल राज में किसी ने कुछ नहीं देखा

  • कृष्णा कुमार, तलवंडी, राजस्थान

एक दिन जंगल में मंकू सियार की बेटी नूरी नदी पर जल भरने जा रही थी। रास्ते में उसे कालू भेड़िया छेड़ने लगा। उसने आनाकानी की, चीखी-चिल्लाई, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। दरिंदा उसके साथ मुंह काला करके चला गया।

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रात भर में सारे जंगल में यह बात फैल गयी। बदनामी के डर से नूरी ने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस इंस्पेक्टर हाथी दादा तहकीकात करने आए। काफी पूछताछ की पर अपराधी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। खरगोश ने कहा साहब मैंने तो कुछ देखा ही नहीं, मैं तो घर में खर्राटे भर रहा था। हिरण ने बताया हम तो बाजार गए हुए थे। बंदर ने कहा हम तो सारे दरवाजे-खिड़कियां बंद करके नाच रहे थे। बबरू बिलाव ने बताया साहब हम तो शरीफ लोग हैं। अपने काम से काम रखते हैं, किसी के मामले में पांव नहीं फंसाते। पूछने पर जिराफ ने नहले पर दहला मारा कि आजकल किसी के बीच में बोलने का जमाना कहां रहा ?

…और गवाह के अभाव में अपराधी बच निकला। सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जंगल में बहू-बेटियों द्वारा आत्महत्या करने का सिलसिला चल निकला है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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