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अल्मोड़ा : सहायता प्राप्त व निजी विद्यालयों को सरकारी सहायता मिले और अभिभावकों को शुल्क से छुटकारा मिले: बिट्टू

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अल्मोड़ा। लॉकडाउन से संकट में आए सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों तथा अभिभावकों का मुद्दा उठाते हुए एनआरएचएम उत्तराखंड के पूर्व उपाध्यक्ष बिट्टू कर्नाटक ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने मौजूदा विकट परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए इन विद्यालयों को वेतन इत्यादि के खर्चे के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा इस अवधि की फीस नहीं वसूलने मांग की है। उनका कहना है कि कोरोना के कारण विद्यालय बंदी की अवधि के लिए अभिभावकों को शुल्क के बोझ से मुक्त किया जाए तथा वेतन व अन्य खर्चों के लिए इन विद्यालयों को सरकारी सहायता प्रदान की जाए।
ज्ञापन में कहा है कि कोविड—19 के कारण शिक्षण संस्थान बन्द हैं और गत 25 मार्च के आदेश से सभी विद्यालयों के सभी प्रकार के शुल्क जमा करवाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगायी गयी है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों से लिये जाने वाले शुल्क से ही विद्यालय अपने कार्मिकों व शिक्षकों को वेतन भुगतान करते हैं और विद्यालय के अन्य खर्चे भी इसी शुल्क पर निर्भर है। मगर शुल्क पर रोक से ये विद्यालय अपने शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गत 22 अप्रैल के आदेश से सभी शासकीय, अशासकीय, सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों को उन अभिभावकों से शुल्क लेने की अनुमति दी गई, जो स्वेच्छा से शुल्क जमा करना चाहते हैं। साथ ही आदेश में सभी शासकीय, अशासकीय, सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों के कार्मिकों व शिक्षकों का मासिक वेतन का भुगतान नियमित रूप से करने की बात भी शामिल है। श्री कर्नाटक ने कहा कि यह स्थिति विद्यालयों के लिये विरोधाभासी है, क्योंकि एक ओर शैक्षणिक संस्थान बन्द होने से वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, दूसरी ओर उनके द्वारा कर्मचारियों व शिक्षकों क वेतन भुगतान करना सम्भव नहीं हो पा रहा है। ऐसी जटिल परिस्थितियों में सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों को सरकार द्वारा बिजली, पानी, भवन आदि देयकों केे भुगतान में छूट दी जानी चाहिये। यह भी कहा है कि आनलाइन शिक्षण कार्य से नेट डाटा पैक के लिए मध्यम एवं निम्न वर्ग के अभिभावकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में छात्रहित में डाटा पैक की छूट दी जानी चाहिए। यह भी कहा है कि वर्तमान में लाँकडाउन से अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और वे शुल्क जमा करने में असमर्थ हैं ।
श्री कर्नाटक ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि कोरोना काल में पूर्ण शुल्क की छूट प्रदान की जाय। साथ ही भविष्य में इस अवधि की फीस भी नहीं वसूली जाय। दूसरी तरफ सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों को वेतन भुगतान आदि की भरपाई के लिये सरकारी आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। तभी कोरोना काल में विद्यालयों को चला पाना संभव हो सकेगा।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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