—कई कांग्रेस कार्यकर्ता शीर्ष नेताओं की लड़ाई से आहत
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर
बागेश्वर कांग्रेस के नगर अध्यक्ष धीरज कोरंगा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने नगर क्षेत्र से आगे रहने के बावजूद ग्रामीण इलाकों से कांग्रेस प्रत्याशी को वोट नहीं मिलने पर निराशा जताई और अपना पद छोड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब वह पार्टी के प्राथमिक सदस्य के रूप में संगठन की मजबूती के लिए कार्य करेंगे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष लोकमणि पाठक को भेजे गए इस्तीफे में कोरंगा ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इस हार के बाद अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते हैं। जिम्मेदार लोगों को अपनी भूमिका को लेकर आत्ममंथन और आत्मचिंतन करना होगा। उन्होंने कहा कि हार के लिए बूथ स्तर का कार्यकर्ता नहीं, संगठन के वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग जिम्मेदार हैं। कहा कि नगर में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया, भाजपा के विधायक प्रत्याशी के बूथ से भी कांग्रेस प्रत्याशी आगे रहे। इसके बाद भी चुनाव में जीत हासिल नहीं हुई। जिस तरह का परिणाम आया है, वह निराश करने वाला है। उन्होंने कहा कि चुनाव हार के कारणों की समीक्षा कर संगठन का गठन नए सिरे से किया जाना चाहिए।
बयानबाजी पर लगे लगाम
बागेश्वर: विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी से आम कार्यकर्ता आहत है। उन्होंने मामले में राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से हस्तक्षेप कर आरोप-प्रत्यारोपों पर लगाम लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरोप—प्रत्यारोप जैसी बयानबाजी से पार्टी को खतरा उत्पन्न हो रहा है।
बागेश्वर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी का कहना है कि चुनाव में मिली हार के बाद शीर्ष नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं, वह किसी के लिए भी ठीक नहीं है। कार्यकर्ता पिछले एक महीने से वोट के लिए मेहनत करता आया। वह समय पर न तो सो पाया और न खा पाया। कार्यकर्ताओं की मेहनत से कांग्रेस के कई विधायक जीतकर आगे आए हैं। पिछले विधानसभा से इस बार उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। अभी सरकार का गठन तक नहीं हुआ है। कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं की इस तरह की बयानबाजी ठीक नहीं है। इससे आम कार्यकर्ता निराश है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द आरोप—प्रत्यारोप पर लगाम नहीं लगी, तो आने वाले समय में कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी गिर जाएगा।


