सीएनई रिपोर्टर, नैनीताल। भारत के सुप्रसिद्ध राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, नैनीताल जिले के रेंज कार्यालय उत्तरी गौला, नथुवाखान परिसर में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वनक्षेत्रधिकारी (RFO) विजय चंद्र भट्ट के कुशल निर्देशन में वन विभाग के कर्मचारियों ने भावपूर्ण ढंग से इस अमर राष्ट्रगीत का गायन किया।
वनक्षेत्रधिकारी विजय चंद्र भट्ट ने अपने संबोधन में ‘वंदे मातरम‘ को मात्र एक गीत नहीं, बल्कि “भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा” बताया। उन्होंने कहा कि इस गीत ने न केवल आजादी की लड़ाई में नई ऊर्जा का संचार किया, बल्कि भारतीय भाषाओं के साहित्य को भी मजबूती प्रदान की और नए आयाम दिए।
महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1874 में रचित यह गीत, आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में देशभक्ति की भावना को जीवित रखता है। भट्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि आजादी की एक संपूर्ण संघर्ष गाथा है।
इतिहास को याद करते हुए, उन्होंने बताया कि यह गीत पहली बार 1896 में कलकत्ता में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। बहुत जल्द ही, यह राष्ट्र प्रेम का प्रतीक गीत अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीय क्रांतिकारियों का मुख्य उद्घोष बन गया। बच्चे, युवा, व्यस्क और यहाँ तक कि भारतीय महिलाओं की जुबां पर भी आजादी की लड़ाई का एकमात्र नारा ‘वंदे मातरम’ गूंजता था।
इस कार्यक्रम में वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनमें वन दरोगा हरतोला पद्मादत्त पांडे, वन दरोगा पहाड़पानी मेलकानी, कृपाल सिंह राणा, बृजेश विश्वकर्मा, संजय टम्टा, और वन रक्षक सुनील, अभय, वीरपाल, गौरव सहित कार्यालय स्टाफ रोहित, पंकज और कुन्दन शामिल थे।

