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दुर्लभ पैंगोलिन शल्क Pangolin Scales के साथ 02 गिरफ्तार, पढ़िये क्या है यह

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सीएनई रिपोर्टर, देहरादून/यूएस नगर

एसटीएफ कुमाऊं ने खटीमा वन प्रभाग टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई के दौरान दो वन्य जीव तस्करों दुर्लभ 3 किलो 100 ग्राम पैंगोलिन शल्क के साथ गिरफ्तार किया है। बरामद खाल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों की है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पुख्ता सूचना के आधार पर कुमराह मार्ग खटीमा फॉरेस्ट इलाके में घेराबंदी की गई। इस दौरान दो व्यक्तियों को रोक उनकी तलाशी ली गई। तोले राम और अरुन कुमार नाम के इन वन्य जीव तस्करों के कब्जे से 3 किलो 100 ग्राम पैंगोलिन शल्क बरामद हुई।

बताया गया है कि तोले सिंह (39 साल) ग्राम घुसरी, थाना नानकमत्ता उधम सिंह नगर तथा अरुण कुमार (39 साल) ग्राम मटिहा, थाना नानकमत्ता उधम सिंह नगर का निवासी है। पूछताछ में दोनों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि यह लोग काफी समय से खटीमा के जंगलों में जंगली जानवरों के शिकार और उनकी तस्करी कर रहे हैं।

उत्तराखंड एसटीएफ अजय सिंह के मुताबिक पैंगोलिन शल्क लगभग एक साल पुराना है। इस पैंगोलिन को इन्होंने खटीमा जंगल में मारा था। टीम के अनुसार पूछताछ में इनसे कई अन्य खुलासे हो सकते हैं। इनके पूरे नेटवर्क के बारे में पता लगाया जा रहा है।

जानिए, क्या होता है पैंगोलिन शल्क, क्यों होती है तस्करी

पैंगोलिन के शरीर का उपरी हिस्सा (Upper body part of pangolin) का उभरा हुआ मछली के कांटेनुमा भाग शल्क कहलाता है। एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक किलो शल्क की बहुत अच्छी कीमत मिलती है, इसलिए वन्य जीव तस्करों द्वारा इन दुर्लभ प्राणियों का शिकार किया जाता है। ऐसा प्रचार है कि पैंगोलिन के शल्क से नपुंसकता दूर होती है और यौन क्षमता बढ़ाती है, हालांकि वैज्ञानिक शोधों में यह सौ प्रतिशत प्रमाणित नहीं है। इस शल्क का उपयोग कुछ कंपनियां यौनवर्धक दवाओं के निर्माण में करते हैं। मुख्य रूप से चीन में इसके प्रयोग से दवाएं बनायी जाती हैं। भारत में इसके मांस को बहुत पसंद किया जाता है। विदेशों में इसे बड़ी कीमतों पर खरीदा जाता है। international market में पेंगोलिन की कीमत भारतीय रुपए में 5 लाख रुपए किलो तक है, जबकि शल्क भी करीब 2 लाख रुपए किलो तक बिक जाया करता है।

यह भी बता दें कि पैंगोलिन एक ऐसा जानवर है, जिसकी दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी हो रही है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मुताबिक दुनियाभर के वन्‍य जीवों की अवैध तस्‍करी में अकेले 20 फीसद का योगदान पैंगोलिन का ही है। सांप, छिपकली की तरह दिखने वाला ये जीव स्तनधारी जीवों की श्रेणी में आता है।

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Deepak Manral
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तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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