अल्मोड़ा : मंसूरी में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि, शहीदों के सपनों का राज्य बनना अभी बांकी

सीएनई संवाददाता, अल्मोड़ा
दिनांक — 2 सितंबर,2020
उत्तराखंड लोक वाहिनी ने यहां वर्चुअल बैठक कर मसूरी गोलीकांड में शहीद हुए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को याद किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर वाहिनी नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य तो बना, लेकिेन अभी इन शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनना बांकी है।
वक्ताओं ने वर्चुअल बैठक में कहा कि बड़े संघर्ष, त्याग व शहादत के बाद उत्तराखंड राज्य मिला। उन्होंने कहा कि इसी संघर्ष के दौरान 2 सितंबर 1994 को आंदोलन को दबाने के लिए तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने आन्दोलनकारियो पर मंसूरी में गोलियां बरसाई थीं। जिसमें हंसा धनाई, बेलमती चौहान, मदन सिंह व राज सिंह बंगारी आदि शहीद हो गये थे। वक्ताओं ने कहा कि शहादत दिवस पर उत्तराखण्ड लोकवाहिनी इन शहीदों की हार्दिक श्रद्धांजलि देती है। साथ ही इन शहीदों के सपनों का उत्तराखंड स्थापित करने के लिए संघर्षरत रहने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर वाहिनी के महासचिव पूरन चन्द्र तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद दो दशक का वक्त गुजर गया, लेकिन अभी शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड नही बना। एडवोकेट जगत रौतेला ने कहा कि शहीदों के सपनों को पूरा करने के लिये उत्तराखंड की आंदोलनकारी ताकतों को एकजुट होना होगा। वाहिनी नेता दयाकृष्ण काण्डपाल ने कहा कि उत्तराखंड लोक वाहिनी आन्दोलनकारी ताकतो को एक मंच पर लाने का पूरा प्रयास करेगी। तभी शहीदों के सपनों को एकजुटता से साकार किया जा सकता है। इस वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता जंगबहादुर थापा व संचालन पूरन चन्द्र तिवारी ने किया। बैठक में हरीश मेहता, हारिस मुहम्मद, अजय मेहता, शमशेर ज्ंग गुरूंग, सुशीला धपोला, रेवती बिष्ट, अजयमित्र बिष्ट, कुणाल तिवारी आदि शामिल हुए।