सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा : उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जनपद में ‘सुरक्षित दवा: सुरक्षित जीवन’ अभियान के तहत विभिन्न स्थानों पर विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में सचिव शचि शर्मा ने ग्राम रैखोली, राजकीय होटल मैनेजमेंट संस्थान और आइडियल कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान में इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं को कानून की बारीकियों से अवगत कराया।

शिविरों का औपचारिक विवरण निम्नलिखित है:
अभियान की मुख्य विशेषताएं
- प्रारंभ: सभी कार्यक्रमों की शुरुआत नालसा थीम गीत ‘एक मुट्ठी आसमान’ के साथ की गई।
- जागरूकता का केंद्र: ‘सुरक्षित दवा: सुरक्षित जीवन’ अभियान के अंतर्गत दवाएं खरीदते समय बरती जाने वाली सावधानियों और एक्सपायरी दवाओं के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
- कानूनी साक्षरता: उपस्थित लोगों को बाल विवाह निषेध, दहेज निषेध अधिनियम और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के कड़े प्रावधानों के बारे में बताया गया।

महत्वपूर्ण योजनाओं पर चर्चा
शिविर के दौरान महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनों पर प्रकाश डाला गया:
- कार्यस्थल पर सुरक्षा: कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के विषय में जागरूक किया गया।
- बाल कल्याण: चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर और किशोर न्याय अधिनियम की जानकारी साझा की गई।
- सुलह-समझौता: जनपद में 02 जनवरी 2026 से संचालित 90 दिवसीय मध्यस्थता अभियान की प्रगति और लाभों के बारे में ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया गया।
- विधिक सहायता: नालसा संवाद योजना 2025 और पात्र व्यक्तियों के लिए उपलब्ध निशुल्क कानूनी सहायता की प्रक्रिया समझाई गई।
सावधानी ही सुरक्षा है: शिविर में सचिव ने स्पष्ट किया कि कानूनी जानकारी के अभाव में अक्सर लोग अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर पाते। दवाओं के मामले में सतर्कता न केवल कानूनी अधिकार है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अनिवार्य है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह को कानूनी जानकारी से संबंधित पंपलेट वितरित किए गए। इस अवसर पर अधिकार मित्र और संस्थान के कर्मचारी भी उपस्थित रहे।


