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बेशर्म बहू-बेवकूफ प्रेमी ! बेटे की उम्र के लड़के से प्यार, सास की हत्या

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36 की उम्र में 21 के युवक से दिल लगा बैठी ‘इश्क’ में अंधी बहू

कभी था क्रिकेट का उम्दा खिलाड़ी, इश्क में गंवा दिया करियर

बेजुबान पुलिस डॉग ने खोला मौत का राज!

पढ़िए, Crime Story: क्रिकेट के मैदान से कत्ल के कालकोठरी तक

CNE REPORTER, लखनऊ। रिश्तों के कत्ल और अनैतिक संबंधों की एक ऐसी खौफनाक दास्तान नवाबों के शहर लखनऊ से सामने आई है, जिसने समाज की रूह को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी एक 36 साल की महिला की है, जिसका दिल अपने ही घर में रहने वाले, अपने बेटे की उम्र के एक 21 वर्षीय युवक पर आ गया। यह युवक कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि कभी क्रिकेट के मैदान पर चौके-छक्के लगाने वाला एक नामी अंडर-16 खिलाड़ी रहा है। इश्क के इस ‘अवैध खेल’ में जब सास रोड़ा बनी, तो बहू ने अपने क्रिकेटर प्रेमी के साथ मिलकर उसका बेरहमी से कत्ल कर दिया।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार महानगर थाना क्षेत्र के निशांतगंज में हुए निर्मला देवी (69) हत्याकांड में पुलिस पूछताछ के बाद जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी बहू रंजना वर्मा (36) ने अपने प्रेमी राजन शर्मा (21) के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। राजन कभी क्रिकेट का होनहार खिलाड़ी था और अंडर-16 टीम का हिस्सा रह चुका था, लेकिन किस्मत और कर्मों ने उसे खेल के मैदान से सीधे कत्ल की अंधेरी कोठरी में धकेल दिया।

उम्र का फासला और मर्यादा तार-तार

कहते हैं कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती, लेकिन जब यह प्यार सामाजिक मर्यादाओं और नैतिकताओं को कुचलने लगे, तो वह अभिशाप बन जाता है। रंजना का 18 साल का एक बेटा है, जो लगभग उसके प्रेमी राजन की उम्र का ही है। रंजना का दिल अपने ही घर में किराए पर रहने आए राजन पर आ गया। 36 वर्षीय रंजना और 21 वर्षीय राजन के बीच पनपे इस रिश्ते ने न केवल ‘सास-बहू’ के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया, बल्कि ममता की गरिमा को भी शर्मसार कर दिया।

विरोध और कत्ल की साजिश

निर्मला देवी को अपनी बहू की इन हरकतों की भनक लग गई थी। घर में आए दिन इस बात को लेकर क्लेश होता था। पति त्रिदेश वर्मा अपनी माँ का पक्ष लेता था और अपनी पत्नी रंजना को डांटता था। निर्मला देवी को अपनी बहू का उस नौजवान के साथ मेलजोल कतई पसंद नहीं था। लेकिन रंजना पर इश्क का भूत इस कदर सवार था कि उसने सास के विरोध को खत्म करने के लिए उन्हें हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का मन बना लिया। 3 दिन पहले ही उसने राजन के साथ मिलकर हत्या की खौफनाक साजिश रची थी।

लूट का ड्रामा और एक ‘गलती’

21 मार्च को जब घर खाली था, रंजना ने राजन को बुलाया। दोनों ने मिलकर निर्मला देवी के हाथ-पैर बांधे और फिर गला दबाकर उनकी जान ले ली। हत्या को ‘लूट’ का रूप देने के लिए उन्होंने लाश से जेवर उतारकर छिपा दिए। किसी को शक न हो, इसलिए उन्होंने घर का CCTV बंद कर दिया था और फिर बाहर चले गए। कुछ दूर जाकर उन्होंने फिर से CCTV ऑन किया, ताकि यह लगे कि वे उस वक्त घर में नहीं थे। लेकिन जब बेटे ने माँ को फोन किया, तो घबराहट में दोनों वापस घर आ गए।

‘घड़ियाली आंसू’ और पुलिस डॉग का ‘न्याय’

बहू घर लौटकर ‘घड़ियाली आंसू’ बहाने लगी, जैसे उसे कुछ पता ही न हो। वह रोते हुए सबसे पूछने लगी कि “इन्हें क्या हो गया है?” मौके पर फॉरेंसिक और डॉग स्क्वायड की टीम पहुंची। और यहीं पर कुदरत का ‘न्याय’ हुआ। पुलिस डॉग (Police Dog) ने गंध सूंघी और सीधा भीड़ में खड़े राजन के पास जाकर रुक गया। आसपास खड़े सभी लोग हक्के-बक्के रह गए। जो शख्स लूट का ड्रामा कर रहा था, वह पुलिस डॉग की एक ‘नज़र’ में कातिल साबित हो गया। बेजुबान की इस सूझबूझ ने कातिलों के चेहरे से नकाब उतार फेंका।

गिरते सामाजिक मूल्य !

यह घटना सिर्फ एक आपराधिक खबर नहीं है, बल्कि हमारे गिरते सामाजिक मूल्यों का एक आईना है। एक तरफ वो महिला है जिसने अपने बच्चों के भविष्य और मर्यादा को ताक पर रख दिया, और दूसरी तरफ वो युवा खिलाड़ी है जिसने चंद रुपयों और आकर्षण के लिए अपना करियर और नैतिकता बेच दी। क्या एक अनैतिक रिश्ते की कीमत एक बुजुर्ग महिला की जान से बढ़कर थी? आज वो घर बिखर चुका है।

एसी पी के मुताबिक, राजन अंडर-16 क्रिकेट खेल चुका था और रंजना ने उसे कार भी खरीदकर दी थी। यह जांच का विषय है कि वह कहाँ से खेला था। लेकिन सवाल यह है कि एक होनहार खिलाड़ी कैसे एक हत्यारा बन गया? इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कातिल चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह एक न एक गलती जरूर करता है। इस मामले में पुलिस ने बहू और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन समाज के सामने कई सवाल छोड़ दिए हैं।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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