वन क्षेत्राधिकारी ने बताए बचाव के उपाय
सीएनई रिपोर्टर, रामगढ़। उत्तरी गौला वन क्षेत्र के प्यूड़ा अनुभाग में वनों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। आरोही संस्था द्वारा संचालित विद्यालय में आयोजित इस संगोष्ठी में विद्यार्थियों और शिक्षकों को ‘वनाग्नि’ (Forest Fire) और ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष’ के गंभीर विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
जंगल की आग: पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए खतरा

उत्तरी गौला के वन क्षेत्राधिकारी विजय चंद्र भट्ट ने बच्चों से चर्चा करते हुए बताया कि वनाग्नि न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाती है, बल्कि यह पारिस्थितिक तंत्र को भी असंतुलित कर देती है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि यदि वे कहीं भी जंगल में आग लगी देखें, तो तुरंत अपने अभिभावकों और स्थानीय वयस्कों को सूचित करें। साथ ही, वन विभाग के साथ मिलकर आग पर नियंत्रण पाने में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया।
वनाग्नि और वन्यजीव संघर्ष का गहरा संबंध
गोष्ठी के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जंगल की आग और आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों का आना एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वन क्षेत्राधिकारी ने समझाया कि:
- जब जंगलों में आग लगती है, तो वन्य जीव अपनी जान बचाने के लिए रिहाइशी इलाकों की ओर भागते हैं।
- प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कारण वन्यजीव आबादी में घुस आते हैं, जिससे अचानक ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष’ की स्थिति पैदा हो जाती है।
“क्या करें और क्या न करें” की दी जानकारी
इस दौरान वन विभाग की टीम ने सुरक्षा के व्यावहारिक गुर भी सिखाए। छात्रों को बताया गया कि वन्यजीवों से आमना-सामना होने की स्थिति में बचाव कैसे किया जाए और किन गलतियों से बचा जाए। वनाग्नि रोकथाम के लिए विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को भी साझा किया गया।
इनकी रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी विजय चन्द्र भट्ट के साथ प्यूड़ा अनुभाग अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा, वन बीट अधिकारी (प्यूड़ा) वीरपाल सिंह, कपिलेश्वर बीट अधिकारी बिपिन बिष्ट, पंकज सिंह, हरेंद्र अधिकारी, रोहित सिंह और वाहन चालक मनोज कैड़ा सहित विद्यालय का स्टाफ मौजूद रहा।


