15 सूत्रीय मांगों के साथ उग्र आंदोलन की चेतावनी
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले जिला अस्पताल की जर्जर और बदहाल स्थिति को लेकर सामाजिक संगठन ‘संघर्ष वाहिनी’ ने बिगुल फूंक दिया है। संगठन के पदाधिकारियों ने अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण करने के बाद व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। निरीक्षण के उपरांत संघर्ष वाहिनी ने 15 सूत्रीय मांग पत्र जारी करते हुए शासन-प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो उग्र जन आंदोलन के साथ प्रशासनिक तालाबंदी की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान संघर्ष वाहिनी के जिलाध्यक्ष कवि जोशी ने कहा कि जिला अस्पताल बागेश्वर में स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार दम तोड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का भारी टोटा है, जिसके कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों को इलाज के बिना ही बैरंग लौटना पड़ रहा है।
ज्ञापन की प्रमुख मांगें:
- अस्पताल में तत्काल दो नए फिजिशियन की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
- जब तक नए चिकित्सकों की तैनाती नहीं होती, वर्तमान चिकित्सकों को कार्यमुक्त न किया जाए।
- एनेस्थीसिया (बेहोशी) के एक अतिरिक्त डॉक्टर की तत्काल नियुक्ति हो।
- रेडियोलॉजिस्ट और सीटी स्कैन तकनीशियन की स्थायी तैनाती की जाए ताकि मरीजों को बाहर न भटकना पड़े।
संघर्ष वाहिनी ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के ‘निशुल्क दवा’ के दावों के बावजूद मरीजों को दवाइयां बाहर से खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। यही नहीं, साधारण रक्त जांच (ब्लड टेस्ट) के लिए भी मरीजों को निजी लैब में भेजा जा रहा है। संगठन ने मांग की है कि सभी जीवन रक्षक दवाइयां अस्पताल के भीतर ही उपलब्ध कराई जाएं और सभी प्रकार की पैथोलॉजिकल जांचें अस्पताल परिसर में ही संपन्न हों।
करोड़ों की लागत से बनी चौथी मंजिल 18 महीने से धूल फांक रही
अस्पताल की आधारभूत संरचना पर सवाल उठाते हुए संगठन ने बताया कि नई बनी चौथी मंजिल पिछले 18 महीनों से बनकर तैयार है, लेकिन इसे अभी तक मरीजों के लिए शुरू नहीं किया गया है। निरीक्षण में अन्य चौंकाने वाली कमियां भी सामने आईं:
- बंद पड़े शौचालय: अस्पताल के अधिकांश शौचालय गंदगी और रखरखाव के अभाव में बंद पड़े हैं।
- जर्जर बेड और बैठने की कमी: मरीजों के लिए अस्पताल में बेड जर्जर हालत में हैं और तीमारदारों के बैठने के लिए बेंचों का अभाव है।
- बंद ऑक्सीजन प्लांट: पिछले एक वर्ष से ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़ा है, जो किसी बड़े संकट को निमंत्रण दे रहा है।
108 सेवा और सफाई व्यवस्था भी पटरी से उतरी
संगठन ने 108 एंबुलेंस सेवा में हो रही देरी, विकलांग एवं बुजुर्गों के लिए अलग पर्ची काउंटर के सुचारु संचालन न होने तथा अस्पताल परिसर में पसरी गंदगी और नालियों की सफाई न होने पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है।
संघर्ष वाहिनी का अल्टीमेटम: “यह आंदोलन सीधे तौर पर आम जनमानस के जीवन से जुड़ा है। यदि हमारी 15 सूत्रीय मांगों पर जिला प्रशासन ने शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की, तो संघर्ष वाहिनी उग्र जन आंदोलन के लिए बाध्य होगी। आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक कार्यालयों में तालाबंदी की जाएगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
इस दौरान संघर्ष वाहिनी के जिलाध्यक्ष कवि जोशी के नेतृत्व में संगठन के अनेक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग दोहराई।


