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रानीबाग : विशाल शवदाह गृह बनाने से नहीं, मिनि हरिद्वार की तर्ज पर विकसित करके होगा विकास, राजमाता जिया कत्यूरी समाज ने रखा अपना पक्ष……

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हलद्वानी। राजमाता जिया कत्यूरी समाज ने नगर निगम द्वारा रानीबाग में प्रस्तावित विद्युत शवदाह गृह पर विस्तार से अपना पक्ष रखा है। संस्था की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि निकट में ही पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के बावजूद सदियों से कत्यूरी समाज के जागर के लिए प्रयुक्त होने वाले स्थान पर निर्माण कार्य करवाना कत्यूरियों की धार्मिक आस्थाओं और मान्यताओं के साथ खिलवाड़ है।
संस्था के उपाध्यक्ष चंदन सिंह मनराल ने कहा कि रानीबाग की धार्मिक, श्रद्धालु व प्रबुद्ध आम जनता के समक्ष राजमाता जिया कत्युरी समाज तमाम विषयों पर अपना पक्ष रख रही है। यह इसलिए आवश्यक है कि रानीबाग के पौराणिक, ऐतिहासिक व धार्मिक अस्तित्व की रक्षा की जिम्मेदारी सबसे पहले यहां की स्थानीय जनता की है। जनता को ही यह निर्णय लेना है कि स्थानीय निवासी रानीबाग को कैसा स्वरुप देना चाहते हैं, क्योंकि हर गतिविधि का सीधा प्रभाव सबसे पहले रानीबाग की जनता पर पड़ता है। संस्था की ओर से जिन बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है, उसे हम ज्यों का त्यों प्रस्तुत कर रहे हैं —

संगठन के गठन का यह है उद्देश्य
राजमाता जिया कत्यूरी समाज एक धार्मिक व सामाजिक संस्था है और इसमें हर विचारधारा व जाति का बराबर सम्मान है। इस समाज में गढ़वाल, कुमाऊं, नेपाल से लाखों कत्युरी परिवार हैं, जो गोलज्यु, रानी जिया, धामदेव, ब्रह्मदेव व अन्य कत्यूरी देवत्व प्राप्त महापुरुषों के प्रति श्रद्धा व सम्मान रखते हैं।
कत्यूरी समाज रानीबाग को उसका पौराणिक, ऐतिहासिक व धार्मिक सम्मान देने के लिए ही गठित किया गया है। जिससे यह संपूर्ण स्थल देश—विदेश में एक पवित्र पर्यटन स्थल के रूप में पुनः स्थापित हो सके।

क्या विकास के नाम पर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ उचित ?
रानीबाग का नाम ही महान कत्यूरी राजमाता कुलदेवी जिया के कर्मस्थली, तपस्थली व समाधिस्थली के कारण ही प्रसिद्ध है। जिसका इतिहास सभी भली भांति जानते हैं। पौराणिक रूप में यह स्थली गार्गी ऋषि की तपस्थली और चित्रशिला के नाम पर ग्रंथों में प्रसिद्ध है।
सबसे बड़ा विषय यह है कि रानीबाग का विकास किस तरह होगा ? विकास के नाम पर इसकी धार्मिक मान्यताओं व आस्थाओं से खिलवाड़ जायज कैसे हो सकता है।

अयोध्या में राम मंदिर की तरह ही अपार आस्था का केंद्र
राम मंदिर सारे मानव समाज का आस्था का विषय रहा है तो सदियों के बाद भी उसका विकास उसी आधार पर किया जा रहा है। कत्यूरी समाज किसी भी विकास के विरुद्ध कभी नहीं हो सकता है क्योंकि वह मानस केदार में विकास के जिस स्वर्णिम युग का प्रतिनिधित्व करता है उसमें केदारनाथ, रूद्र नाथ, गोपेश्वर, विश्वनाथ मंदिर गोपेश्वर, वासुदेव मंदिर जोशीमठ, आदिबद्री, बैजनाथ, मानिला, जागेश्वर व अन्य ऐतिहासिक केंद्र मौजूद हैं। रानीबाग भी उसी क्रम में स्थापित किया जा सकता है।

भव्य शमशान घाट बना देने से नहीं, हरिद्वार की तर्ज पर विकसित करने से होगा विकास
विचारणीय प्रश्न यह है कि रानीबाग का विकास उसे आधुनिक व भव्य शमशान घाटों में परिवर्तित करके संभव है या वहां पर हरिद्वार की तरह भव्य मंदिर, रमणीक स्नान घाट, ध्यान योग केंद्र, धर्मशालाएं, संग्रहालय व ऐतिहासिक जागर के लिए अग्निकुंडों का निर्माण करके चारों ओर हरे भरे वन, फूलों से लदे वृक्ष लगाने से होगा।

विद्युत शवदाह गृह और कत्यूरी समाज का पक्ष
हल्द्वानी की जनता को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो और इसके लिए विद्युत शवदाह गृह के निर्माण से यदि यह कार्य संभव है तो इससे अच्छा कार्य क्या हो सकता है ! लेकिन क्या उस खाली मैदान पर शवदाह गृह बनाना सही है, जहां पर सदियों से कत्युरी समाज जागर स्थल के रूप में अपनी धार्मिक आस्थाओं व भावनाओं को व्यक्त करता है, जबकि विद्युत शवदाह गृह के लिए इस मैदान के अलावा भी बहुत जगह मौजूद हैं।

दो बड़े खेतों पर बनी थी सहमति, नगर निगम पूरा मैदान घेर रहा
यदि विद्युत शवदाह गृह की सालों पुरानी मांग पर विचार करें तो इसके लिए प्रारंभ में स्व. कर्नल दर्श‌न सिंह कार्की व अन्य वरिष्ठ सम्मानित लोगों ने इस मैदान के ठीक नीचे उपलब्ध दो बड़े खेत जैसे स्थलों पर अपना निर्णय दिया था, जिस पर सहमति भी थी। बावजूद इसके अब पूरे उन खेतों के अलावा समस्त मैदान को शवदाहगृह बनाना नगर निगम की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

हल्द्वानी की 45 प्रतिशत जनता कत्यूरी समाज से, पुर्नविचार करे नगर निगम
नगर निगम का फैसला सीधे कत्यूरी समाज की, जिसमें हल्द्वानी के 45% लोग आते हैं और समस्त उत्तराखंड की लाखों जनता की धार्मिक भावनाओं व आस्थाओं पर आघात ही है।
यदि नगर निगम सही दिशा में विचार करे तो विद्युत शवदाह गृह को पुर्ववत निर्धारित स्थल पर जो इस मैदान के नीचे है में बनाना सही होगा। परंपरागत शवदाहगृह घाट के कोनों में सीमेंट के बड़े—बड़े चौकोर आकार के स्टरकचर में बनाये जा सकते हैं। क्या नगरपालिका उस जागर स्थल पर विद्युत शवदाह गृह का निर्माण कर आम जनता को इसे सीधे देखने के लिए मैदान पर निर्माणकर इसे दर्शनीय स्वरुप देना चाहती है ? जहां पर आम जनता जागर के ऐतिहासिक स्वरुप को सदियों से देखती है अब वहां पर दर्शनीय विद्युत शवदाह गृह को देखेगी ?

धन की अनावश्यक बर्बादी क्यों ?
अब विचार करें जितना करोड़ों का धन इस शवदाह गृह के नाम पर आवंटित है उसके आधे से कम में हल्दवानी को आपूर्ति किये जाने वाले पानी को बिल्कुल शुद्ध किया जा सकता है।
इसके लिए नगर निगम यदि कत्यूरी समाज को यह कार्य करने का आग्रह करे तो वह इसे सरलता से अंजाम दे सकती है। जनता खुद देखेगी कि इस विद्युत शवदाह गृह का कुछ समय बाद क्या हाल होगा ? हरिद्वार की विद्युत शवदाह गृह का आंकलन करना चाहिए।

कत्यूरी समाज बाधक नही, गलत चर्चाओं को दें ​वीराम
कत्यूरी समाज इस कार्य में फिर भी बाधक नहीं है, केवल इस शवदाहगृह को इस जागर मैदान से अलग चाहती है। इसके लिए या तो इस मैदान के नीचे की भूमि ठीक है या इस मैदान के बिल्कुल दांये कोने पर जो इंदिरानगर के बगल में है में बनाना उचित होगा। इस मैदान में कत्यूरी समाज भव्य जागर स्थल, वेदियां, मां जिया का भव्य मंदिर, सुंदर धर्मशाला, ध्यान योग केंद्र, संग्रहालय व रमणीक मां जिया वाटिका का निर्माण कर इस स्थल को मिनी हरिद्वार बनाने का संकल्प करता है। जिससे कि इस रानीबाग का ऐतिहासिक महत्व पर्यटन व तीर्थ स्थान के रुप में बन सके। जनता के दरबार में कत्यूरी समाज का अपना पक्ष रखता है, जिससे कि गलत चर्चाओं को विराम दिया जा सके।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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