Almora News : महज एक bridge नही तीन जनपदों की life line है क्वारब पुल, क्वारब पुल की बदहाल दशा पर पालिकाध्यक्ष व्यथित, कहा “हमने वर्ष 2013 में ही कर दिया था आगाह, अब तो कम्भकरणीय निद्रा से जागे विभाग”

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
गत दिनों सपोर्टिंग एंगल टूटने से क्वारब पुल के क्षतिग्रस्त होने की घटना पर पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने गहरी चिंता जाहिर करते हुए संबंधित विभाग से अपनी कुम्भकरणीय निद्रा से जागने की अपील की है। उन्होंने याद दिलाया कि उनके द्वारा वर्ष 2013 में ही विभाग को पत्र लिखकर इस पुल की बदहाल दशा से अवगत करा दिया गया है। इतने सालों में भी एक नया पुल नही बनाया गया। आज यह पुल अपनी आयु पूरी कर चुका है और कभी भी टूट सकता है।
पालिकाध्यक्ष ने कहा कि नैनीताल तथा अल्मोड़ा सीमा पर स्थित क्वारब पुल जो अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ तथा बागेश्वर की लाइफ लाइन है। वहां पर स्थित पुल गत दिनों क्षतिगस्त हुआ था। जिससे इस मार्ग पर चलने वाला यातायात दिन भर प्रभावित रहा। काफी वर्षों से यह मांग की जाती रही है कि क्वारब स्थित पुल जो सम्भवतः अधीक्षण अभियन्ता राष्ट्रीय राजमार्ग हल्द्वानी, अधिशासी अभियन्ता, राष्ट्रीय राजमार्ग अल्मोड़ा के संयुक्त अधिकार में है, की यथाशीघ्र मरम्मत की जाय, लेकिन विभाग की कुम्भकरणीय निद्रा के कारण इसको आज तक नहीं देखा गया।

जिस कारण गत दिनों इसके टूटने की खबर आ गई। पालिकाध्यक्ष ने कहा कि ऐसा लगता है कि विभाग में बैठे अधिकारी इतने उदासीन हैं कि उन्हें इसकी कोई चिन्ता नहीं है। उन्होंने बताया कि नगर पालिका परिषद, अल्मोड़ा कार्यालय के पत्रांक संख्या 128/30–1 (2013-14) दिनांक 17 मई 2013 के द्वारा मुख्य अभियन्ता, (कुमाऊँ क्षेत्र) लोक निर्माण विभाग अल्मोड़ा को पत्र भेजकर उक्त पुल को ठीक करवाने या इसका पुर्ननिर्माण करवाने हेतु लिखा गया था।
उस पत्र के उत्तर में मुख्य अभियन्ता (कुमाऊँ क्षेत्र) लोक निर्माण विभाग, अल्मोड़ा द्वारा अपने पत्र संख्या 6061/09 याता–कु0/2013 दिनांक 23 मई 2013 के द्वारा अधीक्षण अभियन्ता प्रथम/द्वितीय/एनएच वृत लोक निर्माण विभाग अल्मोड़ा/नैनीताल/हल्द्वानी को पत्र लिखकर उक्त पुल की मरम्मत करने के निर्देश दिये गये थे ।
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पालिकाध्यक्ष ने कहा कि यह अत्यन्त ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक इतने वर्ष व्यतीत होने पर भी न तो प्रशासन स्तर से इस पर कार्यवाही हुई है और न ही राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग द्वारा इसको गम्भीरता से लिया गया। उन्होंने कहा कि आवश्यकता तो इस बात की है कि इस पुल के साथ ही साथ एक दूसरा पुल भी वहीं पर बन जाना चाहिए था, ताकि इस पुल का भार कम किया जा सके और वैकल्पिक मार्ग के रूप में दूसरा पुल काम में लाया जा सके।
एनएच के विभागीय अधिकारियों को समझना चाहिए कि यह पुल कितना महत्वपूर्ण है। सीमा की रक्षाओं पर तैनात सैनिकों के लिए भोजन सामग्री, दवाएं तथा युद्ध सामग्री भेजने के लिए भी यही एकमात्र रास्ता है।
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